Himachal में लगातार बढ़ रहे बाल विवाह के केस, पांच साल में चाइल्ड मैरिज एक्ट के इतने मामले दर्ज
पांच साल में चाइल्ड मैरिज एक्ट के 32 मामले दर्ज
संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे
प्रदेश में बाल विवाह के मामले बढ़ रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न पुलिस थानों में वर्ष 2020 से लेकर अब तक बाल विवाह के 32 मामले दर्ज किए हैं, इनमें सबसे अधिक मंडी जिला के पुलिस थानों में चाइल्ड मैरिज एक्ट के दस मामले दर्ज किए हैं। वर्ष 2024 में अब तक चाइल्ड मैरिज एक्ट के छह मामले दर्ज किए हैं, जिसमें पांच मंडी जिला और एक मामला शिमला में दर्ज किया है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश विभिन्न पुलिस थानों में वर्ष 2020 से 2024 में अब तक चाइल्ड मैरिज एक्ट के 32 मामले दर्ज किए हैं, जिसमें वर्ष 2020 में आठ मामले दर्ज किए गए, जिसमें चंबा जिला के तीसा पुलिस थाना, मंडी के गोहर और महिला पुलिस थानाए पुलिस जिला नूरपुर के तहत फतेहपुर पुलिस थाना, सिरमौर जिला के महिला पुलिस थाना में दो मामले और सोलन जिला के अर्की पुलिस थाना में एक, ऊना के सदर पुलिस थाना में चाइल्ड मैरिज एक्ट का एक मामला दर्ज किया है।
वहीं, वर्ष 2021 में भी चाइल्ड मैरिज एक्ट के आठ मामलों में बिलासपुर जिला के बरमाणा और झंडूता पुलिस थाना, मंडी जिला के पद्धर, महिला पुलिस थाना मंडी, सुंदरनगर पुलिस थाना, सिरमौर जिला के नाहन और शिलाई पुलिस थाना एवं ऊना के महिला पुलिस थाना में एक केस दर्ज किया है। इसके अलावा वर्ष 2022 में चाइल्ड मैरिज एक्ट के छह मामले दर्ज किए गए, जिसमें कांगड़ा के नगरोटा बगवां पुलिस थाना, किन्नौर के रिकांगपिओ पुलिस थाना, कुल्लू के भुंतर पुलिस थाना, सिरमौर के पुरूवाला, महिला पुलिस थाना, सोलन के दाड़लाघाट पुलिस थाना में एक मामला दर्ज किया है। वर्ष 2023 में कुल्लू के बंजार में एक और भुंतर पुलिस थाना में दो, सिरमौर के पावंटा सहिब पुलिस थाना में एक मामला दर्ज किया है।
1098, 1090 ,100 नंबर पर करें शिकायत
वर्ष 2024 में मंडी जिला के ऑट पुलिस थाना में एक, बल्ह पुलिस थाना में दो, गोहर में एक, जंजैहली में एक और शिमला के कुपवी में चाइल्ड मैरिज एक्ट का एक केस दर्ज किया है। गौर हो कि बाल-विवाह का अर्थ ऐसे विवाह से है, जिसके बंधन में आने वाले दोनों पक्षकारों में से कोई बालक है। बाल विवाह की शिकायत 1098, 1090 और 100 नंबर पर कर सकते हैं। इसके अलावा बाल विवाह की शिकायत सीधे बाल विवाह निषेध अधिकारी, नजदीकी पुलिस थाने में जिलाधिकारी से भी की जा सकती है।
बाल विवाह निषेध एक्ट पर करेंगे जागरूक
बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 इस अधिनियम का उद्देश्य विवाह को रोकना है, जहां दूल्हा या दुल्हन विवाह योग्य आयु (लड़कियों के मामले में 18 वर्ष और लडकों के लिए 21 वर्ष) से कम है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि समाज से बाल विवाह का उन्मूलन हो, भारत सरकार ने बाल विवाह पर बने पहले के विधान बाल विवाह निषेध अधिनियमए 1929 को बदलकर बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 को अधिनियमित किया। इस नए अधिनियम में बाल विवाह पर रोक लगाने, पीडि़त को राहत और सुरक्षा देने का प्रावधान है।
