Himachal Pradesh

बौद्ध दर्शन इंस्टीट्यूट का प्रोपोजल फिर जागा, CM ने केंद्रीय मंत्री शेखावत को मुलाकात के बाद भेजी चिट्ठी

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मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को मुलाकात के बाद भेजी चिट्ठी

विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे

हिमाचल में चीन बॉर्डर पर ताबो में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बौद्ध दर्शन बनाने का प्रस्ताव फिर जिंदा हो गया है। इससे पहले संस्कृति मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को लगभग खारिज कर दिया था। अपने दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस बारे में बात की थी। इस मुलाकात के बाद अब मुख्यमंत्री की ओर से एक पत्र भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय को भेजा गया है। इसमें यह तर्क दिया गया है कि ताबो में इस संस्थान को बनाने का क्या महत्त्व है? राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री ने कहा है कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत नॉर्दर्न बॉर्डर पर विकास को लेकर भारत सरकार संवेदनशील है।
इसीलिए तिब्बत और चीन का बॉर्डर होने के कारण स्पीति में यह संस्थान बनाया जाना चाहिए। इस संस्थान की स्ट्रैटेजिक वैल्यू होगी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि 2012 में इस संस्थान को बनाने का मकसद बुद्धिस्ट लिटरेचर, फिलासॉफी, आर्ट और कल्चर को प्रोमोट करना और बचाए रखना था। सरकार ने इसके लिए फ्री जमीन देने का ऑफर दे रखा है, लेकिन 2022 में भारत सरकार ने इस संस्थान के लिए पैसा देने से इनकार कर दिया था। तब इस संस्थान के स्ट्रैटेजिक महत्त्व के बारे में बात नहीं हुई थी। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि स्पीति के पोह गांव में 20 एकड़ जमीन इस संस्थान के लिए पहले से ही चिन्हित कर रखी है। इस जमीन को फोरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट 1980 के तहत मंजूरियां भी मिल गई हैं।
107 करोड़ रुपए से होगा निर्माण
इस संस्थान को बनाने के लिए सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ बुद्धिस्ट स्टडीज लेह की टीम ने एक प्रस्ताव तैयार किया है। इसके मुताबिक इस संस्थान की लागत 107 करोड़ आएगी। इस प्रोपोजल को पहले ही संस्कृति मंत्रालय को भेजा जा चुका है, इसलिए अब भारत सरकार इसके स्ट्रैटेजिक महत्व को देखते हुए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत इसे मंजूरी दे। एक तर्क यह भी दिया गया है कि स्पीति वैली के ताबो में 1000 साल पुरानी बुद्धिस्ट मॉनेस्ट्री है, जिसे हिमालय का अजंता भी कहा जाता है। तिब्बत का बॉर्डर होने के कारण इस संस्थान का अलग ही महत्त्व होगा।