सिडनी में बोले विधानसभा अध्यक्ष, भारत-आस्ट्रेलिया की सियासी संस्कृति अलग
सिडनी में बोले विधानसभा अध्यक्ष; मानकों के माध्यम से सर्वोतम प्रथाओं को अपनाना जरूरी
विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने कहा है कि भारत और आस्ट्रेलिया की राजनीतिक संस्कृति में अंतर है। भारत की संसद एक बहुदलीय प्रणाली के भीतर संचालित है। यहां देश की संस्कृतियों, भाषाओं और क्षेत्रीय हितों की विशाल शृंखला को प्रतिबिम्बित करने वाले विविध राजनीतिक परिदृश्य के कारण गठबंधन अकसर आवश्यक होता है। यह विविधता कभी-कभी खंडित शासन की ओर ले जाती है, इससे स्थिर सरकार बनाने के लिए विभिन्न दलों के बीच बातचीत और समझौते की आवश्यकता होती है। इसी तरह ऑस्ट्रेलिया में कई पार्टियां होने के बावजूद अकसर दो-दलीय प्रभुत्व प्रणाली देखी जाती है। मुख्य रूप से लिबरल-नेशनल गठबंधन और लेबर पार्टी के बीच अधिक स्थिर शासन और स्पष्ट चुनावी परिणाम मिल सकते हैं।
श्री पठानिया सिडनी शहर में 67वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बैंच मार्किंग, मानकों और दिशा निर्देशों के माध्यम से संसद की संस्था को मजबूत करने में सर्वोतम प्रथाओं को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि जो विधायी प्रभावशीलता, पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ाते हैं। प्रतिनिधि एक राजनीतिक प्राणी है, उसे अपने राज्य की रुचि को भी देखना है और अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी करना है। इस अवसर पर विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार भी उपस्थित थे।
संसदीय प्रणाली में अध्यक्ष या सभापति की भूमिका अहम
कुलदीप पठानिया ने कहा कि हमारी संसदीय शासन प्रणाली में अध्यक्ष या सभापति की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। अध्यक्ष या सभापति के पास जबरदस्त शक्तियां होती हैं और साथ ही बड़ी जिम्मेदारियां भी निहित होती हैं। श्री पठानिया ने कहा कि हालांकि इन महत्त्वपूर्ण भूमिकाओं को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए संसदों को लगातार विकसित होना चाहिए, सर्वोतम प्रथाओं को अपनाना चाहिए जो उनके घटकों की आवश्यकताओं के प्रति उनकी कार्यक्षमता और जवाबदेही को बढ़ाएं। बैंच मार्किंग मानक और दिशा निर्देश इस विकास में एक आवश्यक भूमिका निभाते हैं, जो मूल्यांकन, सुधार और जवाबदेही के लिए रूपरेखा प्रदान करते हैं। सदन के अंदर दुनिया का कोई कानून नहीं है, जो उसे बोलने से रोक सके या जोर-जबरदस्ती से उसकी आवाज को दबा सके।
