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मानव उत्थान सेवा समिति चंबा द्वारा सत्संग का आयोजन.

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नेक सिंह ठाकुर (ट्राइबल टूडे न्यूज)चंबा।

आज रविवार को साप्ताहिक सत्संग श्री हंस सत्संग मंदिर , सुल्तानपुर में हुआ ।
सर्वप्रथम मानव धर्म के प्रेणता परम पूज्य सदगुरुदेव श्री सतपाल महाराज जी के परम शिष्य एवं मानव उत्थान सेवा समिति जिला चम्बा के प्रभारी – पूजनीय महात्मा श्री तिलकानंद जी ने सभी उपस्थित दीक्षित प्रेमियों को साधना भजन अभ्यास कराया । तत्पश्चात, सत्संग मे पधारे प्रेमियों को अपने सत्संग उद्वोधन में पूजनीय महात्मा जी ने उपस्थित भगवद भक्तों को परमात्मा का ज्ञान प्राप्त करने का आह्वान किया । उन्होंने बताया कि भगवान की भक्ति की शुरुआत आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात ही होती है। अतएव समय के तत्वदर्शी सदगुरदेव महाराज आध्यत्मिक ज्ञान प्राप्त करने के बाद ही जीव का अमूल्य मनुष्य जीवन सफल हो सकता है । महात्मा श्री तिलकानन जी ने सत्संग में प्रेमी जनों को संबोधित करते हुए कहा कि सत्संग सुनने से भगवान को जानने की जिज्ञासा पैदा होती है । सत्संग ही भगवान को प्राप्त करने का प्रथम सोपान है। महात्मा जी ने बताया कि हमारे जीवन का परम उदेश्य केवल संसार की रचना करने वाले भगवान, जिसने हमें बनाया है, की प्राप्ति ही है । इस सत्संग के दौरान सत्संग प्रेमियों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि महापुरुषों ने परोपकार व समाज कल्याण की भावना को ध्यान में रखते हुए शास्त्रों/सद्ग्रंथो की रचना की है। अगर वेद शास्त्र /ग्रन्थ और मंदिर न होते तो समाज भगवान को भूल जाता है। महात्मा श्री तिलकानंद जी ने बताया कि मानव जीवन का एकमात्र उद्देश्य परोपकारी जीवन व्यतीत कर ईश्वर की साधना करना है यह साधना तत्वदर्शी पुरुष के पास ही मिल सकती है सच ही कहा है गुरु बिन गति नहीं सच्चा गुरु ही जीवन में भवसागर को पार कराता है, शिष्य का दायित्व बनता है कि गुरु के शब्दों की अनुपालन धर्म के रास्ते में चलाकर अपने जीवन को सार्थक बनाएं। सत्संग का मुख्य उद्देश्य अभी यही है कि हम मिलजुल कर अपने जीवन को सच्चिदानंद के चरणों में समर्पित कर अपने धर्म का पालन करते हुए मानव धर्म का पालन करें। साप्ताहिक होने वाले सत्संग में सभी प्रेमी भक्त जनों ने भजन कीर्तन गाकर अपने आप को धन्य समझा वहीं पर सतगुरु के सानिध्य में रहकर अपने जीवन को धन्य माना। साप्ताहिक सत्संग होने के पश्चात प्रसाद भी ग्रहण किया गया।