काँगड़ा फोरलेन में आया शहीद का स्मारक सहेजेगा एनएचआई, भूमि चिन्हित
मलां में शहीद कैप्टन शैलेष रियालच के स्मारक का करेंगे पुनर्निर्माण, भूमि चिन्हित
विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे
फोरलेन की जद में आकर जहां बुजुर्गों के बनाए घर, दुकानें, पशुशालाएं, श्मशानघाट, मंदिर, स्कूल, दफ्तर उजड़ गए वहीं मातृभूमि की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान के स्मारक भी विकास की आंधी में विस्थापन से स्वयं को बचा नहीं पाए। आज से करीब 18 साल पहले नगरोटा बगवां के अंबाडी स्थान पर श्रद्धाभाव से सेना मंडल से नवाजे गए शहीद कैप्टन शैलेष रियालच की पुण्यस्मृति में स्थापित स्मारक भी अब इसी स्थान पर ज्यादा दिन देखने को नहीं मिलेगा। सुखद यह है कि फोरलेन की जद में आने वाली भूमि, निर्मित ढांचों, पेड़ों आदि का बाकायदा उचित मुआवजा प्राधिकरण द्वारा दिया जा रहा है।
वर्तमान स्थान पर भूमि उपलब्ध न होने की वजह से उच्च मार्ग प्राधिकरण अब इसे मलां में स्थापित करने की कवायद में लग गया है जिसके लिए शहीद के परिजनों द्वारा निजी भूमि मुहैया करवाई गई है। प्राधिकरण के माध्यम से धौलाधार बिल्डर्ज नाम की प्राइवेट कंपनी ठेके पर स्मारक का निर्माण करेगी जिसके लिए करीब 35 लाख की राशि निर्धारित की गई है । जानकारी के मुताबिक उक्त स्थान पर शहीद की प्रतिमा के साथ एक ध्वज मंच तथा एक लाइब्रेरी स्थापित की जाएगी।
24 नवंबर 1999 में पीया शहादत का जाम
14 अक्तूबर 1975 को जन्मे कैप्टन शैलेष रियालच ने अनंतनाग में 24 नवंबर 1999 में आतंकवादियों से लोहा लेते तथा अपने सहयोगियों को बचाते समय शहादत का जाम पीया था। परिजनों ने अंबाडी में शहादत को जिंदा रखने के लिए एक भव्य स्मारक का निर्माण कर एक पुस्तकालय तथा कंप्यूटर ट्रेनिंग केंद्र की स्थापना की थी जिसका लोकार्पण नौवीं कोर के लेफ्टिनेंट जनरल पीके रामपाल ने 14 अक्तूबर 2006 में किया था
