Himachal News: नगरोटा बगवां के मलां में खतरे के बीच पढ़ाई कर रहा देश का भविष्य
फोरलेन की जद में आए प्राइमरी स्कूल के खस्ताहाल कमरों के चलते छात्र ठंड में बाहर पढ़ाई करने को मजबूर, सुध लेना भुला प्रशासन-विभाग
विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे
प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में मूलभूत ढांचों और यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे नौनिहालों की सुविधा और सुरक्षा के प्रति हमारे नीति नियंता और अधिकारी कितने सजग हैं, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण इन दिनों नगरोटा बगवां शिक्षा खंड के मलां स्थित प्राइमरी स्कूल में देखा जा सकता है। यहां नर्सरी से पांचवीं तक के नन्हे-मुन्ने बच्चे खतरे के साए में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ऐसा कतई नहीं कि पूरी तरह फोरलेन की जद में आकर धूमिल हो चुके स्कूल के प्रांगण में बिना चार दिवारी, बिना रिटेनिंग वाल, बिना शौचालय, हजारों छोटे-बड़े वाहनों से व्यस्त उच्च मार्ग के मुहाने पर बैठकर छह घंटे पढ़ाई करने वाले बच्चों पर सरकारी नुमाइंदों या जिम्मेदार अधिकारियों की निगाह न पड़ी हो। स्कूल प्रबंधन गत 10 माह से विभाग को स्कूल की वस्तुस्थिति से अवगत करवा रहा है, लेकिन विभाग है कि जानकर भी अनजान बना हुआ है।
गत जून माह में फोरलेन के पंजे ने स्कूल के अस्तित्व को मिटा दिया था, तब से लेकर आज तक उधारी के जीर्ण शीर्ण कमरों में चल रहे स्कूल की सुध लेना तथा बच्चों के साथ स्टाफ के लिए भी नाममात्र शौचालय की व्यवस्था करना भी किसी ने जरूरी नहीं समझा। इस आशय की गुहार भी स्कूल प्रबंधन प्रशासन और विभाग के उच्च अधिकारियों से लगातार लगाता आ रहा है । इस दौरान स्थानीय निकाय के साथ प्रबंधन समिति के प्रस्ताव भी रद्दी साबित हुए, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। स्कूल की मौजूदा स्थिति देखते हुए किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं, जहां पढ़ाई कर रहे बच्चों से मात्र कुछ गज की दूरी पर फोरलेन की भारी मशीनरी उठापटक में लगी हो और निर्माण सामग्री के साथ मिट्टी से भरे ट्रक अनलोड हो रहे हों। वर्तमान समय में उच्च शिक्षा विभाग के खस्ताहाल कमरों में प्राइमरी स्कूल चल रहा है तथा पर्याप्त कमरों के अभाव और ठंड के चलते बच्चों को बाहर बिठाना स्कूल की मजबूरी भी है।
ग्रांट-लोगों के आश्वासन के बाद शौचालय का काम
कहीं से भी किसी तरह की सकारात्मक पहल होती न देख स्कूल प्रबंधन ने अब मरम्मत के नाम पर मिलने वाली नियमित वार्षिक ग्रांट तथा स्थानीय लोगों के आश्वासन के बाद शौचालय निर्माण की कवायद शुरू की है। प्रबंधन को यह भी चिंता सताने लगी है कि अब तक जुटाई गई राशि से निर्माण संपन्न होना मुनासिब नहीं तथा कहीं उनका प्रयास असफल साबित न हो।
तिजौरी गर्म कर रहे 15 लाख
सरकार के शिक्षा विभाग ने उक्त स्कूल को वर्ष 2023 में ज्ञानोदय उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा भी दिया है, जहां इन दिनों बच्चों को शौचालय सहित पढ़ाई के लिए बैठने तक का स्थान नहीं। दर्जे के मुताबिक स्कूल को बच्चों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए मिली 15 लाख की राशि आज भी विभाग की तिजौरी को गर्म कर रही है, जिसको कब कहां खर्च करना है, कोई नहीं जानता।
अभिभावकों-लोगों ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
स्कूल प्रबंधन ने परिसर में मंडराते खतरे को खुले मन से स्वीकार करते हुए कहा है कि उन्होंने विभाग को लिखित रूप से समय रहते वस्तुस्थिति से अवगत करवा दिया है। उधर, अभिभावकों तथा स्थानीय लोगों ने भी विभाग की उदासीनता पर कई सवाल उठाएं हैं तथा बच्चों के प्रति इस तरह के रवैये को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
छात्र संख्या ज्यादा
प्राइमरी स्कूल नगरोटा बगवां शिक्षा खंड का उत्कृष्ट विद्यालय होने के साथ इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यहां शिक्षा खंड के अन्य सभी स्कूलों से अधिक छात्र संख्या है। नर्सरी की कक्षा भी बाकायदा चल रही है।
