पार्वती प्रोजेक्ट के लिए 606 परिवारों ने दी मातृभूमि की कुर्बानी, ऊर्जा विकास की भेंट चढ़े 30 गांवों के लोग
विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे
कुल्लू जिला में 1208 बीघा निजी भूमि का अधिग्रहण, ऊर्जा विकास की भेंट चढ़े 30 गांवों के लोग
कारपोरेट जगत में अपने संस्थान की स्थापना के 50 साल पूरे होने पर स्वर्ण जयंती वर्ष मना रही देश की नवरत्न कंपनी एनएचपीसी ने ऊर्जा विकास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। राष्ट्र की महत्त्वाकांक्षी पार्वती जल विद्युत परियोजना में ऊर्जा निगम ने 25 वर्षों के बाद अब बिजली की चारों टरबाइनें घुमा कर राहत की सांस ली है। भले ही पार्वती प्रोजेक्ट चरण दो में एनएचपीसी ने उतरी भारत के नौ राज्यों को रोशन करने का मसौदा तैयार किया, लेकिन इसके लिए कुल्लू जिला के सैकड़ों लोगों ने विस्थापन का दंश झेला है। पार्वती प्रोजेक्ट में सैंज, मणिकर्ण व गड़सा घाटी के 30 गांव से अधिक ऊर्जा विकास की आहुति चढ़े हैं। सैंज तहसील की रैला पंचायत सबसे ज्यादा विस्थापन का दंश झेल रही है।
पंचायत के भाटकंढा, बूपन, शरण, खड़ोहा, शुलगा, रुमरा, डाहरा, घाट सेरी, कुंडर, मझाण, उप रैला, टमुहल, जीबा व सियूंड आदि दर्जनों गांव के सैकड़ों ग्रामीणों की 1208 बीघा भूमि अधिग्रहण की गई, जबकि 606 परिवारों ने प्रोजेक्ट में अपनी मातृभूमि को कुर्बान किया। हालांकि एनएचपीसी ने 20 परियोजना प्रभावित परिवारों को रोजगार उपलब्ध करवाया किंतु अभी भी सैकड़ों परिवार रोजगार की राह देख रहे हैं। -एचडीएम
ऊर्जा उत्पादन में मील का पत्थर
एनएचपीसी के कार्यपालक निदेशक निर्मल सिंह ने बताया कि ऊर्जा उत्पादन में मील का पत्थर साबित होने जा रही पार्वती परियोजना कुल्लू जिला में एनएचपीसी की पहली अपनी परियोजना है। पार्वती प्रोजेक्ट के साथ ही एनएचपीसी की कुल उत्पादन क्षमता 8140 मेगावाट तक पहुंच गई है।
