लाहुल में कांग्रेस के दुर्ग को भेदना भाजपा के लिए चुनौती
कांग्रेस का गढ़ माना जाता है लाहुल-स्पीति, बीजेपी ने पूर्व विधायक रवि ठाकुर पर खेला है दांव
ट्राइबल टुडे
कांग्रेस के गढ़ रहे लाहुल-स्पीति विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव में इस बार भाजपा को सीट निकालने की आस है। कांग्रेस के इस दुर्ग को भेदने के लिए भाजपा ने इस बार कांग्रेस पृष्ठभूमि से संबंधित और अब भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक रवि ठाकुर पर दांव खेला है। भाजपा ने इस बार होने जा रहे विस उपचुनाव में भाजपा के पूर्व प्रत्याशी डा. रामलाल मार्कंडेय को दरकिनार कर पूर्व में कांग्रेस के टिकट से चुनाव लडक़र जीत हासिल करने वाले पूर्व विधायक रवि ठाकुर पर दांव खेल डाला है। ऐसे में जहां रामलाल मार्कंडेय ने बगावत करते हुए जहां आजाद या फिर कांग्रेस के टिकट से चुनाव लडऩे का ऐलान किया है। वही, अब वह कांग्रेस नेताओं से लगातार संपर्क करने में जुटे हुए हैं। हालांकि यह अभी भविष्य के गर्भ में हैं कि मार्कंडेय कांग्रेस का हाथ थामते हैं या फिर भाजपा की ओर से उन्हें भी मनाने की कोशिशें होती हैं, लेकिन यह साफ है कि मार्कंडेय अपने राजनीतिक विरोधी के साथ आगे नहीं चलेंगे। बता दें कि 1967 से बने इस विस क्षेत्र में जहां शुरुआत में एक बार देवी सिंह ठाकुर ने निर्दलीय चुनाव लडक़र जीत हासिल की थी।
1972 में रवि ठाकुर की माता स्वर्णलता ठाकुर कांग्रेस की विधायक बनी थी। 1977 और उसके बाद 1982, 1985 तक लगातार तीन बार देवी सिंह ठाकुर कांग्रेस के टिकट पर यहां काबिज रहे। 1990 और फिर 1993 में दो बार कांग्रेस के फुंचोंग राय और 1998 में रामलाल मार्कंडेय ने हिविका से टिकट लेकर जीत हासिल की थी। साल 2003 में रघुवीर सिंह ठाकुर कांग्रेस से जीत हासिल की थी। साल 2007 में पहली बार जनजातीय जिला में डॉ. रामलाल मार्कंडेय ने भाजपा का फूल यहां पर खिलाया था। साल 2012 में रवि ठाकुर कांग्रेस से विधायक बने। साल 2017 में रामलाल मार्कंडेय फिर से, जबकि साल 2022 में रवि ठाकुर कांग्रेस से टिकट लेने के बाद विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे। लेकिन वर्तमान में उन्हें सदस्यता खोनी पड़ी। हालात ऐसे पैदा हुए कि उन्हें भगवा का दामन थामना पड़ा।
कांग्रेस में दाबेदारों की लिस्ट हुई लंबी
भाजपा ने जहां रवि को मैदान में उतारा है, वहीं, कांग्रेस पार्टी में टिकट की दावेदारी के लिए एक लंबी पांत खड़ी हो गई है। ऐसे में कांग्रेस के लिए यहां उम्मीदवार का चयन करना और रवि ठाकुर के जाने के बाद अब इसका डैमेज कंट्रोल करना सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के लिए बना हुआ है। अब देखना है कि कांग्रेस और भाजपा किस तरह से इन चुनौतियों को पार कर पाती है और कांग्रेस के दुर्ग को भाजपा भेदने में सफल रहेगी या फिर जीत कांग्रेस की होती है।
