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भारत बदल रहा है नए युग की शुरुआत

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सीजेआई ने की सरकार की ओर से लाए गए तीन नए कानूनों की तारीफ
कहा, नए क्रिमिनल लॉ समाज के लिए ऐतिहासिक
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संवाददाता विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे,

ये जरूर सफल होंगे, यदि हम नागरिक के रूप में उन्हें अपनाएंगे

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम को रिप्लेस करने के लिए केंद्र की मोदी सरकार की ओर से लाए गए तीन नए कानूनों की तारीफ की है। उन्होंने विधि एवं न्याय मंत्रालय की तरफ से नए कानूनों को लेकर आयोजित एक कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि तीनों नए कानून समाज के लिए बेहद जरूरी हैं और भारत अपनी आपराधिक न्याय प्रणाली में महत्त्वपूर्ण बदलाव के लिए तैयार है। सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि नए कानूनों ने आपराधिक न्याय पर भारत के कानूनी ढांचे को एक नए युग में बदल दिया है। नए कानून जरूर सफल होंगे यदि हम नागरिक के रूप में उन्हें अपनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पीडि़तों के हितों की रक्षा करने और अपराधों की जांच और मुकदमों को कुशलतापूर्वक चलाने के लिए इन तीनों कानूनों में बहुत जरूरी सुधार पेश किए गए हैं।
सीजेआई ने कहा कि संसद से इन कानूनों का पास होना एक स्पष्ट संकेत है कि भारत बदल रहा है और आगे बढ़ रहा है और मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए नए कानूनी जरूरतों को अपना रहा है। सीजेआई ने कहा कि पुराने कानूनों की सबसे बड़ी खामी उनका बहुत पुराना होना था। ये कानून क्रमश: 1860, 1873 से चले आ रहे थे। नए कानून संसद से पारित होना इस बात का साफ संदेश है कि भारत बदल रहा है और हमें मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए नए तरीके चाहिए, जो नए कानूनों से हमें मिलने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए कानूनों के अनुसार छापामारी के दौरान साक्ष्यों की ऑडियो विजुअल रिकॉर्डिंग होगी, जो अभियोजन पक्ष के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। जस्टिस ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में ट्रायल और फैसले के लिए टाइमलाइन तय होना एक सुखद बदलाव है।