आठ साल में बना बायोडायवर्सिटी पार्क उजड़ा
संवाददाता विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे,
अब भी पर्यटन निगम को नहीं सौंपा, उद्घाटन के अढ़ाई वर्ष बाद भी शुरू नहीं
हिमाचल प्रदेश में सरकार, प्रशासन व पर्यटन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। पिछले आठ वर्षों में पहाड़ी राज्य हिमाचल का पहला बॉयोडायवर्सिटी पार्क बनकर अब उजड़ भी गया है। इतना ही नहीं, पूर्व सरकार के उद्घाटन किए जाने के अढ़ाई वर्ष बीत जाने के बाद भी पार्क को सूचारू रूप से नहीं चलाया गया है और आम जनता व देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए नहीं खोला गया है। अब भी पर्यटन निगम को सौंपने की तैयारी चल रही है, जबकि प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है। इतना ही नहीं, प्रदेश का पहला ट्यूलिप गार्डन अब धौलाधार बॉयो-डायवर्सिटी पार्क बन गया है, जबकि जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में पहले ट्यूलिप गार्डन के बाद उत्तराखंड के पिथौरागढ़ और हिमाचल के ही पालमपुर में ट्यूलिप गार्डन तैयार भी कर दिया गया, जबकि एशियन डिवेलपमेंट बैंक (एडीवी) की ओर से फंडिड प्रोजेक्ट कंजरविंग प्रोमिनेट टैंपल प्रिसिंक्स एंड अपग्रेडिंग अरबन इन्फास्ट्रक्चर फॉर टूरिज्म इन धर्मशाला एंड मकलोडगंज के तहत सात करोड़ में ट्यूलिप का एक भी पौधा नहीं लग पाया है। इतना ही नहीं, प्रोजेक्ट के तहत जो अन्य फूल उगाए, वह भी उजड़ गए हैं। ट्यूलिप गार्डन का निर्माण कार्य 10 सितंबर, 2016 को शुरू करवाया गया था, जबकि 31 अगस्त, 2020 को इसे धौलाधार बॉयो-डायवर्सिटी पार्क बनाकर कार्य पूरा भी कर दिया गया था।
इसके बाद वर्ष 2022 में पूर्व भाजपा सरकार के समय में बॉयोडाईवर्सिटी पार्क का तत्कालीन मुख्यमंत्री की ओर से उद्घाटन भी कर दिया गया था। बावजूद इसके अब अढ़ाई साल बीतने को हैं, लेकिन उसके बाद भी सूचारू रूप से चलाने की कार्रवाई को पूरी तरह से ठंडे बस्ते ही डाल दिया गया।
