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इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से नहीं फैलेगा प्रदूषण

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आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं की खोज, पर्यावरण के अनुकूल विद्युत चुंबकीय हस्तक्षेप रोधक समाधान किया विकसित,

संवाददाता विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे,

इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होने से एक तरह का प्रदूषण पैदा होता है, जिसे विद्युत चुंबकीय दखल कहते हैं। यह विद्युत चुंबकीय दखल रडार, मिलिट्री के उपकरणों और इंटरनेट के काम को खराब कर सकती है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को इस दखल से बचाने के लिए चुंबकीय रोधक पदार्थों की जरूरत होती है और यही काम अब ब्लेंडेड कंपोजिट मैटीरियल कर रहे हैं। आईआईटी मंडी और फि नलैंड के वीटीटी रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों की एक टीम ने मिलकर एक खास तरह के कंपोजिट मैटीरियल बनाए हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के शोधकर्ताओं ने विभिन्न उपयोगों के लिए बनाए गए जैव. अपघटनीय प्राकृतिक फाइबर से बने मिश्रित पदार्थ विकसित किए हैं, जो खासतौर पर विद्युत चुंबकीय हस्तक्षेप (ईएमआई) रोकने में कारगर साबित होंगे। वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक रेशों से बना ऐसा मैटीरियल बनाया है जो खुद नष्ट हो जाता है और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता है। खासतौर पर बिजली के दखल को रोकने में यह काफी फायदेमंद साबित होंगे।
बतातें कि इस टीम का नेतृत्व आईआईटी मंडी के मैकेनिकल और मैटीरियल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. हिमांशु पाठक और डा. सनी जफ र कर रहे हैं। साथ में आईआईटी मंडी के रिसर्च स्कॉलर आदित्य प्रताप सिंह और फिनलैंड के वीटीटी रिसर्च सेंटर के रिसर्च साइंटिस्ट डा. सिद्धार्थ सुमन भी इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इन वैज्ञानिकों का लक्ष्य ऐसे कंपोजिट मैटीरियल बनाना है जो न सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को विद्युत चुंबकीय दखल से बचाए बल्कि पर्यावरण को नुकसान होने से भी रोकें। डा. हिमांशु पाठक आईआईटी मंडी में स्कूल ऑफ मैकेनिकल एंड मटेरियल्स इंजीनियरिंग में एसोसिएट प्रोफेसर इस नए कंपोजिट के बारे में बताते हैं कि दीर्घकालिक भविष्य के लिए ऐसे आविष्कारों की ज़रूरत है जो चीजों को बेहतर तो बनाएं ही, साथ ही पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचाए।