मिड डे मील कर्मचारियों का मानदेय रुका
मार्च तक का दिया है वेतन, कर्मचारी परेशान
18 हजार कर्मचारी मिड डे मील के दायरे में
संवाददाता संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे,
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील बनाने वाले करीब 18 कर्मचारियों को मार्च के बाद मानदेय नहीं मिला है। इस कारण कर्मचारी परेशानी में हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कम मानेदय में गुजारा करना मुश्किल हो गया है। एक तो उन्हें बेहद कम पैसे मिलते हैं और वे भी अब समय से नहीं मिल रहे हैं। इस कारण कर्मचारी परेशानी है। दूसरी तरफ शिक्षा विभाग का कहना है कि मिड डे मील कर्मचारियों को दिए जाने वाले मानदेय में स्टेट और सेंटर दोनों का शेयर होता है। स्टेट का शेयर कर्मचारियों को एक सप्ताह के भीतर जारी कर दिया जाएगा जबकि केंद्र सरकार से अभी ग्रंाट ही नहीें मिली है।
ऐसे में ग्रांट जारी होने के बाद यह मानदेय जारी होगा। कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई के दौर में मात्र चार हजार रुपये के नाममात्र मानदेय से गुजारा करना मिड-डे मील वर्करों के लिए गुजारा करना मुश्किल हो गया है। अब हाल ही में सरकार ने फरमान जारी किया कि क्लस्टर स्तर पर खाना बनाया जाएगा। अभी तक 20 वर्षों से स्कूलों में खाना बनता रहा है। उन्होंने मांग की कि उसी क्रम में यह व्यवस्था आगे भी जारी रहे। मिड-डे मील वर्करों को नियमित किया जाए।
12 माह का मिलना है मानदेय
हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि शिक्षा विभाग मिड-डे मील वर्कर्स के साथ भेदभाव नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि मिड-डे मील वर्कर्स 10 माह के बजाय 12 माह के के वेतन के हकदार हैं। कोर्ट ने कहा कि जब शिक्षा विभाग स्कूलों में तैनात शिक्षकों और गैर शिक्षकों को लाखों रुपये पूरा वर्ष देता है तो उस स्थिति में मिड-डे मील वर्कर्स के साथ भेदभाव नहीं कर सकता।
केंद्र सरकार से हिमाचल को मिड डे मील के लिए ग्रांट नहीं मिली है। मार्च तक का मानदेय दे दिया गया है बाकि पेडिंग मानदेय भी जल्द ही जारी कर दिया जाएगा।
आशीष कोहली
निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग
-सोनिया
