Himachal Pradesh

प्रदेश भर में सेटेलाइट टाउन बसाएगी सरकार

Spread the love

जमीन की तलाश कर रही सरकार, जनता से भी लैंड सेल के लिए मांगे ऑफर

शिक्षा व स्वास्थ्य समेत सडक़ बिजली-पानी जैसी सुविधाओं से लैस कालोनियां होंगी तैयार

संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे,

भविष्य की मांग को मद्देनजर रखते हुए हिमाचल प्रदेश में जगह-जगह सेटेलाइट टाउन विकसित करने की तैयारी चल रही है। इस महत्त्वपूर्ण योजना को धरातल पर उतारने के लिए चुनिंदा जगहों पर उपयुक्त जमीन की तलाश की जा रही है। सेटेलाईट टाउन योजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने आमजन से भी लैंड सेल के लिए ऑफर मांगे गए हैं। अभी तक 20 जगह से लैंड सेल के लिए ऑफर आ चुके हैं, जबकि बाकी जगहों से ऑफर आने के बाद एक प्रॉपर कार्ययोजना बनेगी। खास बात यह है कि तमाम सुविधाओं से लैस सेटेलाइट टाउन तैयार करने के लिए जल्द ही कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। तकनीकी शिक्षा एवं आवासीय मंत्री राजेश धर्माणी ने इसकी पुष्टि की है।

उन्होंने बताया कि सेटेलाइट टाउन को लेकर हिमुडा प्लानिंग तैयार कर रहा है। जगह जगह ऐसे टाउन विकसित किए जाएं, जहां लोगों को सभी जरूरी सहूलियतें उपलब्ध हो सकें। यहां पार्क, पार्किंग, सीवरेज, पानी, बिजली और सडक़ के साथ ही प्लेग्राउंड इत्यादि सुविधाएं विकसित कर जनता को एक बेहतर व्यवस्था उपलब्ध करवाई जाएगी। टाउन के पास एक बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। लोगों से लैंड सेल की ऑफर मांगी गई हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अभी तक 20 लोगों ने लैंड सेल को लेकर इच्छा जाहिर की है।

साइबर टाउन विकसित करने को भूमि की तलाश

राजेश धर्माणी ने बताया कि प्रदेश में साइबर टाउन विकसित करने की दिशा में भी सरकार योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ रही है। इसके लिए चुनिंदा जगहों पर उपयुक्त जमीन की तलाश चल रही है। बिलासपुर जिला के स्वारघाट व कोटधार क्षेत्र में 500 से 1000 बीघा तक जमीन देखी जा रही है। अभी तक 40 बीघा जमीन ही मिल पाई है।

एम्स के पास आवासीय कॉलोनी-कम-कॉमर्शियल सेंटर

एम्स के पास भी आवासीय कालोनी कम कॉमर्शियल सेंटर विकसित करने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। मंडी-भराड़ी और भगेड़ में आवासीय कालोनी और कॉमर्शियल सेंटर विकसित किए जाएंगे। साथ ही इन दोनों जगहों पर बस स्टैंड भी निर्मित किए जाएंगे। फोरलेन से कनेक्ट दोनों ही जगह बड़े जंक्शन होने के चलते कार्ययोजना तैयार की जा रही है। जमीन उपलब्ध होने पर योजना को धरातल पर उतारने के लिए काम किया जाएगा।