हर साल ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा 25 जून
केंद्र का फैसला, 1975 में इसी दिन इंदिरा गांधी ने लगाई थी एमर्जेंसी
कांग्रेस ने मोदी सरकार के फैसले को बताया सुर्खियां बटोरने की कवायद
आठ नवंबर को आजीविका हत्या दिवस के रूप में मनाएंगे लोग
अखिलेश का तंज,30 जनवरी को बापू हत्या दिवस के रूप में मनाया जाए
संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे,
केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए 25 जून को संविधान हत्या दिवस घोषित किया है। इसे लेकर सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। 25 जून, 1975 को देश में एमर्जेंसी लागू किया गया और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अगले दिन 26 जून को रेडियो पर देश की जनता को इस बात की जानकारी दी। गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट पर जारी अधिसूचना को शेयर कर यह जानकारी दी। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 25 जून, 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी तानाशाही मानसिकता को दर्शाते हुए देश में आपातकाल लगाकर भारतीय लोकतंत्र की आत्मा का गला घोंट दिया था। लाखों लोगों को अकारण जेल में डाल दिया गया और मीडिया की आवाज को दबा दिया गया। भारत सरकार ने हर साल 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया है। यह दिन उन सभी लोगों के विराट योगदान का स्मरण कराएगा, जिन्होंने 1975 के आपातकाल के अमानवीय दर्द को झेला था। गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का यह फैसला भारत के इतिहास में काफी विवादास्पद रहा है। इसे लागू करने की कई वजहों में से एक राजनीतिक अस्थिरता बताई जाती है।
एमर्जेंसी के दौरान कई चीजों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। प्रेस पर सेंशरशिप लागू करने के साथ-साथ नागरिकों की स्वतंत्रता को भी सीमित कर दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसले का स्वागत करते हुए ‘एक्स’ पर लिखा कि 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ देशवासियों को याद दिलाएगा कि संविधान के कुचले जाने के बाद देश को कैसे-कैसे हालात से गुजरना पड़ा था। यह दिन उन सभी लोगों को नमन करने का भी है, जिन्होंने आपातकाल की घोर पीड़ा झेली। देश कांग्रेस के इस दमनकारी कदम को भारतीय इतिहास के काले अध्याय के रूप में हमेशा याद रखेगा।। जेपी नड्डा ने कहा कि पच्चीस जून 1975 वह काला दिवस था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के तानाशाही मानसिकता ने हमारे संविधान में निहित लोकतंत्र की हत्या कर देश पर ‘आपातकाल’ थोपा था। यह दिवस हमारे सभी महापुरुषों के त्याग एवं बलिदान का स्मरण कराएगा, जो कांग्रेस के इस तानाशाही मानसिकता के विरुद्ध संघर्ष करते हुए संविधान की रक्षा तथा लोकतंत्र की पुनस्र्थापना के लिए यातनाएं सही और दिवंगत हो गए।
उधर, कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले को एक और सुर्खियां बटोरने वाली कवायद बताया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह नॉन बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री की एक और सुर्खियां बटोरने वाली कवायद है, जिसने दस साल तक अघोषित आपातकाल लगाया था। उसके बाद भारत के लोगों ने उसे चार जून, 2024 को एक निर्णायक व्यक्तिगत, राजनीतिक और नैतिक हार दी, जिसे इतिहास में मोदी मुक्ति दिवस के रूप में जाना जाएगा। उन्होंने साथ ही कहा कि अब से हर साल आठ नवंबर को भारत के लोग आजीविका हत्या दिवस के रूप में मनाएंगे। इसी बीच मोदी सरकार के फैसले पर तंज कसते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि 30 जनवरी को बापू हत्या दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए।
