HRTC एचआरटीसी को हर महीने 10 करोड़ की चपत
डीजल-पेंशन पर जा रहा 55 फीसदी पैसा; खुद की कमाई 75 करोड़, सरकार दे रही 60 करोड़
संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे,
सरकार के सामाजिक दायित्व की पूर्ति कर रही एचआरटीसी को हर महीने 10 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह नुकसान सरकार के दायित्वों की पूर्ति करने की वजह से हो रहा है, जिसकी एवज में सरकार पूरी भरपाई नहीं कर पा रही है। यही कारण है कि हर महीने 10 करोड़ के नुकसान का आंकड़ा सालाना 120 करोड़ में बदल रहा है और एचआरटीसी खुद के दायित्वों को पूरा नहीं कर पा रहा है। अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन की अदायगी उससे नहीं हो रही है, तो वहीं पेंशन के लाले भी पड़ चुके हैं। सूत्रों के अनुसार एचआरटीसी ने अपने घाटे के कारणों और उससे उभरने की रणनीति को लेकर जो रिपोर्ट बनाई है, उस पर मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा की जाएगी। प्रदेश मंत्रिमंडल के सामने पूरी बात रखी जाएगी और यह बताया जाएगा कि आखिर सरकार की वचनबद्धताओं को पूरा करने के चलते सरकार को एचआरटीसी की कितनी मदद करनी चाहिए, जो कि नहीं हो पा रही है।
सूत्रों की मानें को एचआरटीसी ने जो रिपोर्ट बनाई है, उसमें कुछ सुधारात्मक कदम उठाने की बात है। सरकार का बताया जाएगा कि निगम को क्या करना चाहिए। इसमें किराया बढ़ोतरी या फिर कंसेशन आदि की योजनाओं को बंद करने का जिक्र भी किया गया है, ताकि निगम की हालत में सुधार हो। या फिर इसकी एवज में सरकार पैसा बढ़ाए, तो उसकी कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है। निगम के पास जो आमदनी है उसका 55 फीसदी पैसा डीजल व पेंशन पर खर्च हो रहा है।
सरकार की सहायता से भी नहीं सुधर रहे परिवहन निगम के हालात
हर महीने सरकार एचआरटीसी को 60 से 62 करोड़ रुपए की राशि दे रही है। इस महीने यह राशि 63 करोड़ रुपए दी गई, मगर इससे भी निगम के हालात नहीं सुधर रहे। यह पूरा पैसा कर्मचारियों के वेतन और पेंशन
