Himachal Pradesh

हिमाचल में जान की दुश्मन बनी बरसात, हादसों से डरे लोग

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भरमौर में भूस्खलन, किन्नौर में बादल फटने से तबाही, मंडी में जनजीवन अस्त-व्यस्त

संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे,

हिमाचल समेत उत्तर भारत के तीन राज्यों में ऑरेंज अलर्ट का बड़ा असर रविवार को देखने में मिला है। हिमाचल और पंजाब की सीमा पर होशियारपुर में हुए एक दर्दनाक हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई है। इस हादसे में एक बच्चे को जिंदा बचाया गया है, जबकि एक अन्य लापता है। इसके साथ ही भरमौर के खड़ामुख में भी भूस्खलन की वजह से यातायात बाधित हुआ है। इससे मणिमहेश यात्रा पर असर पडऩे की संभावना बढ़ गई है। हालांकि विभाग ने जल्द ही व्यवस्था कर लेने की बात कही है। प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी बादल फटने की घटनाएं हुई हैं। इनमें रविवार को दो अलग-अलग जगहों पर बादल फटने की घटना हुई हैं। इनमें किन्नौर में बादल फटने की वजह से एनएच-05 प्रभावित हुआ है।

पूह में हुई इस घटना से पूह से कौरिक तक एनएच बाधित हो गया है। यहां आवाजाही नहीं हो पा रही है। एनएच का नौ मीटर हिस्सा धंस गया है। घटना के बाद से यहां राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है, जबकि दूसरी ओर भारी बारिश से मंडी-कुल्लू एनएच नौ मील के पास पंडोह के पास बंद हो गया है। यहां एनएच बंद होने के बाद यातायात को चेलचौक से सुंदरनगर की तरफ मोड़ा गया है। एनएचएआई नेशनल हाई-वे को बहाल करने में जुट गई है।

288 सडक़ें; पांच एनएच, 450 ट्रांसफार्मर ठप

बीते चौबीस घंटे में प्रदेश भर में 288 सडक़ें और पांच एनएच बाधित हो गए हैं। इन क्षेत्रों में आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है। पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई ने इन सडक़ों को बहाल करने के लिए कर्मचारियों और मशीनरी तैनात कर दी है। विभाग ने बारिश थमते ही 20 फीसदी से ज्यादा सडक़ों को बहाल करने की बात कही है। इनमें सबसे ज्यादा सडक़ें मंडी में बाधित हुई हैं। यहां 96 सडक़ें दो एनएच, शिमला में 76 , कुल्लू में 37 और एक एनएच लुहड़ी से बराड़ के बीच बाधित है। सिरमौर में 33 सडक़ें और एक एनएच बाधित होने से आवाजाही प्रभावित हुई है। चंबा में 26, हमीरपुर में पांच, कांगड़ा के पालमपुर डिवीजन में चार और किन्नौर में चार सडक़ों समेत एक एनएच बाधित है। इसके अलावा 450 से अधिक बिजली ट्रांसफार्मर और 48 पेयजल योजनाएं भी बाधित हैं।

सिरमौर में मंदिर बहा

सिरमौर के नाहन में मारकंडा नदी के किनारे बना मंदिर बह गया। प्रदेश भर में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। इनमें एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी और जलशक्ति विभाग ने कर्मचारियों को तैनात कर प्रभावित क्षेत्रों में सप्लाई लाइन को दोबारा से जोडऩे के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

रामपुर में धंसी सडक़

शिमला के रामपुर में तकलेच देवठी सडक़ पर बने सेरी पुल के समीप का 50 मीटर का हिस्सा फिर से धंस गया है। शनिवार रात को क्षेत्र में हुई बारिश के कारण यह हिस्सा धंसा है। देवठी में सेब सीजन शुरू होने वाला है, लेकिन सडक़ धंसने से बागबानों की चिंता बढऩा शुरू हो गई है।

कालका-शिमला फोरलेन पर भूस्खलन

कालका-शिमला फोरलेन परवाणू से धर्मपुर तक वन-वे कर दिया है। सिरमौर में राष्ट्रीय राजमार्ग-707 पर सतौन के समीप बिना बारिश के ही साफ मौसम में पहाड़ी दरकने से बड़ी मात्रा में मलबा आ गया। इसके चलते हाई-वे करीब तीन घंटे तक बंद रहा।

रानीताल में धंसा फोरलेन

निजी संवाददाता-रानीताल

शनिवार रात से हो रही लगातार भारी बारिश के चलते मटौर-शिमला फोरलेन में रानीताल के रसूह चौक के पास नवनिर्मित फोरलेन का डंगा धंसने से सडक़ का 100 मीटर हिस्सा भी रेलवे लाइन पर जा गिरा। ट्रैक पर भारी मलबा गिरने से रेलवे लाइन का नामोनिशान मिट गया है। इतना ही नहीं, जिस हिसाब से बारिश हो रही उससे फोरलेन का एक बड़ा हिस्सा भी धंसने की कगार पर है। बारिश से फोरलेन की एक साइड पूरी तरह से धंस गई है। सारा मलबा ट्रैक पर गिरने से रेलने लाइन को भी भारी नुकसान हुआ है। गौरतलब है कि पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे मार्ग पर बरसात के चलते रेलों की आवाजाही पूरी तरह से बंद है। लेकिन जिस हिसाब से रेलवे लाइन को क्षति पहुंची है इसे ठीक करने में कई दिनों का समय लग सकता है। बरसात की पहली बारिश से फोरलेन के डंगों का इस तरह से गिरना कंपनी की काम की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे है। ऐसे में अब फोरलेन से गुजरना खतरे से खाली नहीं है।