सिरमौर में मिली इस दुर्लभ धातु की खदान …
जिला में खनन विभाग के वैज्ञानिकों ने लाइम स्टोन के बाद गलेन लैड की भी देखी संभावनाएं
दोनों धातुएं बदल सकती हैं जिला की आर्थिकी
विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे
जिला सिरमौर में लाइम स्टोन के बाद दो अन्य धातुओं की संभावनाएं जगी हैं। जिला सिरमौर में खनन विभाग ने गलेन लैड व वैनेडियम धातुओं की संभावनाएं जिला में खदान के लिए देखी हैं। हालांकि अभी दोनों धातुओं के दोहन के लिए सर्वे कार्य ही हुआ है। बताते हैं कि यदि दोनों धातुओं का खनन की दृष्टि से उपयोग होता है, तो जिला सिरमौर की आर्थिकी में ओर इजाफा होगा।
प्रदेश सरकार को भी राजस्व के तौर पर रायल्टी में बढ़ोतरी होगी। गौर हो कि जिला सिरमौर में पिछले चार दशक से भी अधिक समय से लाइम स्टोन का दोहन किया जा रहा है। हालांकि सुप्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी किंकरी देवी के पहाड़ों को खनन से अत्याधिक दोहण की कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद अब कुछ ही चूना खदानों का वैज्ञानिक तरीके से खनन हो रहा है। खनन विभाग के वैज्ञानिक जिला में गलेन लैड अथवा सिक्का जिसका प्रयोग बारूद इत्यादि बनाने में किया जाता है की संभावनाएं देखी गई हैं। जिला में ही दुर्लभ धातु वैनेडियम के भी भंडार की संभावनाएं देखी गई हैं। -एचडीएम
जिला सिरमौर में लाइम स्टोन के अलावा गलेन लैड और दुर्लभ धातु वैनेडियम के भंडार को देखा गया है, जिसका दोहन सर्वे के बाद ही कहा जा सकता है
कुलभूषण शर्मा, जिला खनन अधिकारी, सिरमौर
प्रदेश सरकार को करोड़ों की रॉयल्टी
गौर हो कि वैनेडियम धातु को दुर्लभ धातु की श्रेणी में रखा गया है, जिसका प्रयोग हवाई जहाज की लाइनिंग मेनटेन करने के लिए किया जाता है। जिला सिरमौर का चूना पत्थर खदान चार दशक से संचालित है, जिसमें रेणुकाजी, बनोर, शिलाई इत्यादि क्षेत्रों में लाइम स्टोन का दोहन किया जा रहा है, जिससे प्रदेश सरकार को जहां करोड़ों की रॉयल्टी प्राप्त हो रही है। अकेले बनोर माइंस से ही विगत चार वर्षों से साढ़े 12 करोड़ का डिस्बर्समेंट वेलफेयर स्कीम में किया गया है, जबकि अकेले एक माइंस से प्रदेश सरकार को भी एक करोड़ से अधिक का रेवेन्यू प्राप्त हुआ। यदि दोनों धातुओं का दोहन यहां पर किया जाता है, तो सिरमौर की आर्थिकी को पंख लगेंगे।
