HRTC Pensioners News : फिलहाल नहीं मिल पाएगी पेंशन, निगम के पास पैसा नहीं
एचआरटीसी के 7 हजार पेंशनरों की जेब खाली, सरकार ने दिए सिर्फ 55 करोड़ उससे दे दिया वेतन, 15 करोड़ रूपए अतिरिक्त देने को लिखा पत्र
संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे
हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम के पेंशनरों की जेब इस महीने खाली रह गई है। बुधवार को प्रदेश सरकार के सभी पेंशनरों को तो पेंशन डाल दी गई मगर एचआरटीसी के पेंशनरों को पेंशन नहीं आई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि निगम के पास पैसा नहीं है। इस महीने एचआरटीसी को सरकार से जो पैसा आना चाहिए था वो पूरी तरह से नहीं मिल पाया। अब कम राशि मिलने पर केवल वेतन का ही खर्चा निकल पाया और निगम ने अपने कर्मचारियों को वेतन की अदायगी पहले ही कर दी। राज्य सरकार ने सभी पेंशनरों को 9 तारीख को पेंशन देने का निर्णय लिया था मगर एचआरटीसी के पास 9 तारीख को भी पैसा नहीं है। निगम ने सरकार को एक पत्र लिखा है जिसमें उनसे आग्रह किया है कि 15 करोड़ रूपए की राशि जारी की जाए ताकि वह अपने पेंशनरों की देनदारी को दे सकें। इस महीने सरकार ने एचआरटीसी को सिर्फ 55 करोड़ रूपए की राशि ही दी है जिसमें से 45 करोड़ रूपए उसके कर्मचारियों को वेतन में लग जाते हैं। निगम के जो 7 हजार पेंशनर हैं उनको पेंशन के लिए 20 करोड़ रूपए मासिक चाहिए। क्योंकि निगम के पास जो पैसा था और उसने जो कमाई पिछले महीने की है उससे टायर का खर्चा, तेल का खर्चा और स्पेयर पार्ट आदि का खर्चा हो गया है जिस वजह से उसके पास पैसा नहीं बचा। ऐसे में पेंशनरों को अब पेंशन देने के लाले पड़ गए हैं।
बताया जाता है कि निगम ने सरकार से 65 से 70 करोड़ रूपए की डिमांड की थी। क्योंकि निगम सरकार के लिए सामाजिक सरोकार के दायित्व का निर्वहन कर रहा है। उसे सरकार से सालाना 900 करोड़ रूपए की राशि इन सेवाओं की एवज में चाहिए मगर सरकार उसे 700 करोड़ रूपए देती है और उसमें भी कटौती की जा रही है। इस बार भी जो डिमांड भेजी गई थी उसमें से सरकार के वित्त विभाग ने केवल 55 करोड़ रूपए की राशि उसे जारी की और इनकी डिमांड पूरी नहीं हो सकी है। हालांकि पिछले महीने निगम ने 68 करोड़ रूपए की कमाई की है मगर अन्य खर्चों पर वह पैसा लगा है। अभी निगम को अपना 50 साला जश्र भी मनाया है जिसके लिए भी वह तैयारियां कर रहा है। मगर इससे पहले यहां पेंशनरों को पेंशन नहीं दे पाया है जिससे इन सेवानिवृत कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ी है।
यहां बता दें कि अपनी वित्तीय जरूरतें पूरी नहीं होने से कर्मचारी व पेंशनर नाराज हैं। 14 अक्टूबर से कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन का एलान कर दिया है जिसकी पूरी रणनीति बन चुकी है। इसपर अब समय पर पेंशन नहीं मिलने से पेंशनर यूनियनें भी धरने पर उतरेंगी यह तय है। इन वर्गों में फैल रहे रोष को अब दबाना मुश्किल होगा जिसमें एचआरटीसी प्रबंधन ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। यहां बता दें कि निगम के एमडी रोहन चंद ठाकुर ने पहले ही यह कह रखा है कि जिस दिन उनके कर्मचारियों को वेतन मिलेगा वह भी तभी वेतन लेंगे मगर अब इन वर्गों का रोष बढ़ चुका है ऐसे में आने वाले दिनों में मुसीबत बढ़ सकती है।
एचआरटीसी ने अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं जिसका थोड़ा असर दिख रहा है। परंतु उसका घाटा काफी ज्यादा है, कर्मचारियों का वेतन व भत्ते सरकार की तर्ज पर है वहीं पेंशनरों के लिए ओपीएस लागू कर रखा है और साथ ही सरकार की रियायती सेवाओं का दायित्व भी निगम उठा रहा है। इनकी एवज में वह सरकार से पैसा मांगता है जो पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रहा है। सरकारी की रियायती सेवाओं की ही बात करें तो 50 लाख रूपए का रोजाना का नुकसान हो रहा है जो रविवार या अवकाश वाले दिन में कम होता है।
पेंशनरों की पेंशन के लिए फिलहाल पैसा नहीं है। सरकार को पत्र लिखा है और उम्मीद है कि जल्दी ही पैसे का इंतजाम हो जाएगा। पैसा मिलते ही पेंशन रिलीज कर दी जाएगी। हमारी कोशिश रहती है कि जल्द से जल्द देनदारियों को चुकता कर दें।
-रोहन चंद ठाकुर, एमडी, एचआरटीसी
