Himachal Pradesh

CM का कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिवाली गिफ्ट, इस बार इस तारीख को मिलेगी सैलरी-पेंशन

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विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे

4 फीसदी डीए के साथ क्लास फोर को 20 हजार एरियर, वेतन, पेंशन का भुगतान भी इस महीने 28 को होगा, मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने किया ऐलान, सभी को मेडिकल रिइंबर्समेंट का टोटल भुगतान होगा, कुल 2500 करोड़ इसी महीने खर्च करेगी सरकार

हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों को 4 फीसदी महंगाई भत्ते की किश्त के साथ इस बार 28 अक्टूबर को वेतन व पेंशन की अदायगी की जाएगी। इन वर्गों को सरकार ने दीपावली का तोहफा देने का एलान किया है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में यह घोषणा करते हुए कहा कि महंगाई भत्ते की 1.1.2023 की लंबित किश्त जारी की जाएगी जिसका फायदा प्रदेश के 1 लाख 80 हजार कर्मचारियों और 1 लाख 70 हजार पेंशनरों को होगा। उन्होंने कहा कि इससे सरकारी कोष पर अतिरिक्त रूप से 600 करोड़ रूपए का बोझ पड़ेगा। इस महीने सरकार कुल 2500 करोड़ रूपए का लाभ प्रदान करेगी। डीए के एरियर को लेकर वित्त विभाग अलग से आदेश करेगा।

इसके साथ सीएम ने कहा कि प्रदेश में वित्तीय अनुशासन कायम करने के लिए वेतन व पेंशन में देरी की गई थी मगर इस बार 28 अक्टूबर को ही इसकी अदायगी कर दी जाएगी। इसके बाद वेतन पहली तारीख को ही दिया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को उनके वेतनमान के एरियर के 20 हजार रूपए इसी वित्त वर्ष में जारी कर दिए जाएंगे वहीं 75 साल से ऊपर के पेंशनरों का बकाया एरियर भी चुकता कर दिया जाएगा। इसपर करीब 202 करोड़ रूपए का खर्च आएगा। इस प्रेस वार्ता में उनके साथ उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री, स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल, हरीश जनारथा, नरेश चौहान, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना व प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार मौजूद थे।

गरीब से नहीं लेंगे पानी का बिल, बिजली सबसिडी अभी बंद नहीं

सीएम ने कहा कि सुधार की प्रक्रिया लगातार चल रही है लेकिन सरकार के कड़े फैसलों का असर आम जनता पर नहीं पड़ा है। यहां 300 यूनिट से ऊपर बिजली की सबसिडी खत्म की है मगर अभी यह निर्णय लागू नहीं हुआ है। इसी तरह से पानी की सबसिडी को खत्म करके वसूली की जा रही है मगर यह गरीबों से नहीं होगी। जो बिल नहीं दे सकता उसका ख्याल सरकार रखेगी। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय में जीएसटी का 1500 करोड़ मुआवजा आता था जो अब बंद हो गया है वहीं आरडीजी भी 10 हजार करोड़ से 3 हजार करोड़ रह गया है।