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बिना पर्यावरणीय मंजूरी कैसे लगे उद्योग

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पंडोगा में तीन कारखानों की स्थापना पर एनजीटी का सवाल

संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला में स्थापित प्रमुख उद्योग क्षेत्र पंडोगा में लगे उद्योगों को लेकर सवाल उठाए हैं। एनजीटी ने कहा है कि बिना पर्यावरणीय मंजूरी के यह उद्योग कैसे लग गए। इस मामले में प्रदेश सरकार से चार सप्ताह में जवाब देने को कहा गया है। एनजीटी ने इस मामले में सवाल खड़ा करते हुए पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र में ‘ए’ और ‘बी’ श्रेणी के अंतर्गत आने वाले तीन उद्योगों को पर्यावरण मंजूरी प्रमाण-पत्र प्राप्त किए बिना स्थापित करने पर सवाल उठाया है। एनजीटी के न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य डा. अफरोज अहमद की पीठ ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि किस तरह राज्य सरकार ने 2015 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से इसेंशियलिटी सर्टिफिकेट प्राप्त करने से खुद को यह कहकर बचा लिया था कि औद्योगिक क्षेत्र 500 हेक्टेयर से कम क्षेत्र में बन रहा है और यहां कोई भी श्रेणी ‘ए’ और ‘बी’ उद्योग स्थापित नहीं किया जाएगा।
न्यायाधिकरण ने कहा कि हिमाचल ने इस आधार पर पूर्व पर्यावरण मंजूरी के लिए कार्यवाही नहीं की कि औद्योगिक क्षेत्र के विकास का क्षेत्रफल 500 हेक्टेयर से कम था और उसके पास उक्त क्षेत्र में किसी भी ‘ए’ या ’बी’ श्रेणी के उद्योग की स्थापना का प्रस्ताव नहीं था। इसमें कोई विवाद नहीं है कि तीन उद्योगों, जो कि श्रेणी ए’ और ’बी’ में है, को अनुमति दी गई है। इससे पर्यावरण कानूनों के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। इस संबंध में अब सरकार को नोटिस का जवाब देना होगा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्रवाई करेगा। इसके बाद मामला एनजीटी में जाएगा। इससे प्रदेश के दूसरे उद्योग क्षेत्रों में यदि कोई इस तरह के उद्योग लगे