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हद है आईजीएमसी में खुले में हो रही है ईसीजी

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हिमाचल के सबसे बड़े अस्पताल में लापरवाही की हदें पार, बिना क्यूबिक्न पर्दा लगाए टेस्ट करने से उठे सवाल

विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे
इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज व अस्पताल में नए ओपीडी भवन के आपातकालीन विभाग में होने वाले ईसीजी टेस्ट लापरवाही से किए जा रहे हैं। मरीजों का ईसीजी टेस्ट ईसीजी रूम के दरवाजे के अंदर बिना क्यूबिकल पर्दा लगाए खुले में किया जा रहा है। मरीजों को असुविधाजनक स्थिति में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नए ओपीडी भवन के एमर्जेंसी और ट्रामा विभाग मे बहुत से मरीज इलाज करवाने आते है। बता दें कि आईजीएमसी में अस्पताल प्रबंधन की ओर से मरीजों के लिए ईसीजी, सीटी स्कैन, एक्स-रे की सुविधा नए ओपीडी भवन की तीसरी मंजिल में उपलब्ध करवाई गई है।
इससे प्रदेशभर से उपचार के लिए आने वाले मरीजों को आपात स्थिति में यहां वहां नहीं भटकना पड़ेगा। इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज एवं अस्पताल की एमर्जेंसी में रोजाना 100 से अधिक मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं। एमर्जेंसी में मेडिसिन, सर्जरी और ऑर्थो मरीजों का भी उपचार होता है। ऐसे में यहां अकसर भीड़ लगी रहती है। ऐसे मे मरीजों का ईसीजी टेस्ट बिना ग्रीन स्क्रीन लगाए किया जा रहा है। जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस तरह होता है ईसीजी
इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम एक सरल और तेज परीक्षण है। इसके जरिए हृदय की विद्युत गतिविधि को मापा जाता है। परीक्षक द्वारा छाती, हाथ और पैरों पर इलेक्ट्रोड लगाया जाता है। ये इलेक्ट्रोड त्वचा से चिपकने वाले छोटे, प्लास्टिक के पैच होते हैं। इनमें सुइयां नहीं होतीं और ये दर्द-रहित होते हैं। इलेक्ट्रोड को तारों से जोडक़र ईसीजी मशीन से कनेक्ट किया जाता है। मशीन द्वारा हृदय की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड किया जाता है