धर्मपुर को नगर पंचायत बनाने के विरोध में उतरे ग्रामीण
विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे
धर्मपुर को नगर पंचायत बनाने के निर्णय पर स्थानीय लोग भड़क गए हैं। धर्मपुर, कलस्वाई, बरडाना, छपाणु और बनवारकलां के लोगों ने तहसीलदार धर्मपुर रमेश चंद के माध्यम से शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव को ज्ञापन भेजकर अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की है। प्रदेश सरकार ने धर्मपुर पंचायत को नगर पंचायत बनाने का फैसला लिया है। इसके लिए मंत्रिमंडल से मंजूरी मिल चुकी है। अब प्रदेश सरकार ने दो सप्ताह का समय आपत्तियां दर्ज करने के लिए दिया है। सोमवार को विरोध में उतरी महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि किसी भी हालत में धर्मपुर को नगर पंचायत स्वीकार नहीं किया जाएगा। धर्मपुर विस क्षेत्र का अधिकतर क्षेत्र ग्रामीण है। अधिकतर लोग मनरेगा पर निर्भर हैं। लोग किसी तरह का कर और शुल्क देने में असमर्थ हैं। धर्मपुर पंचायत की प्रधान ज्योति देवी ने कहा कि धर्मपुर को नगर पंचायत का दर्जा दिया जा रहा है, लेकिन सरकार को गरीब लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए। शुल्क देने में असमर्थ लोग मनरेगा जैसी योजनाओं पर निर्भर हैं। इसके अलावा लोगों को करीब 15 साल तक करमुक्त रखना चाहिए। उधर संधोल में भी नगर पंचायत के प्रस्ताव को कैबिनेट की मोहर लगने के बाद सियासी उबाल शुरू हो गया है। अब संधोल क्षेत्र के लोग भी नगर पंचायत बनाने से नाखुश नजर आ रहे हैं। संधोल क्षेत्र के कई महिला मंडल नगर पंचायत बनाने के विरोध में उतरे हैं। इनमें महिला मंडल जोल, महिला मंडल मनसा माता, आंबेडकर महिला मंडल दतवाड़, महिला मंडल बजीर चौक, बाबा रविदास महिला मंडल दतवाड़, महिला मंडल सकलानी बस्ती दतवाड़ और संधोल पंचायत के तहत आने वाले बाशिंदों ने जिला परिषद सदस्य के माध्यम से जिलाधीश मंडी को आपत्ति भेजी है। नगर पंचायत के अंतर्गत शामिल किए गए इलाकों के बाशिंदों का मानना है कि पंचायतों में गरीब परिवार हैं, जो मुख्य रूप से पशुपालन, मनरेगा और अन्य छोटे कार्य कर अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। नगर पंचायत बनने से यहां के गरीब परिवारों पर करों का अतिरिक्त भार पड़ेगा, उससे इन परिवारों की आर्थिक स्थिति और खराब होगी।
