Himachal Pradesh

हिमाचल में घटता जा रहा ‘रिवर बेसिन’, इतने फीसदी आई कमी

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विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे

रावी-ब्यास-चिनाब-सतलुज सहित सहायक नदियों के बेसिन में 19 से 23 फीसदी की कमी
प्रदेश के पहाड़ों और धौलाधर पर्वत शृंखला पर बर्फबारी में लगातार कमी हो रही है। वहीं नदियों का बेसिन भी घट रहा है। कम बर्फबारी का सीधा असर मौसम, नदियों के जलस्तर और फसलों पर हो रहा है। एक अध्ययन के अनुसार सर्दियों में बर्फबारी के चलते 55673 वर्ग किमी भौगोलिक क्षेत्र का लगभग एक तिहाई हिस्सा बर्फ से ढका रहता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बर्फ कम पड़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार धौलाधार पर्वत शृंखला पर 1973 में करीब 430 सेंटीमीटर बर्फ गिरी थी, लेकिन यह धीरे-धीरे कम होती जा रही है। 1973 के बाद दो दशक से भी कम समय में बर्फबारी का ग्राफ करीब तीन सौ सेंमी कम हो गया। 1990 में 102 सेंमी और 2010 में सिर्फ 51.33 सेंमी बर्फ रिकार्ड की गई। वैज्ञानिकों के अनुसार पहाड़ों पर बर्फ गिरने की दर में हर साल औसतन 18 फीसदी की कमी आ रही है, जो कि बेहद चिंता का विषय है।
एक अध्ययन के अनुसार सन 2020 तक हिमालय में 40 से 65 प्रतिशत बर्फ की परत में कमी दर्ज की गई है। इस कारण नदियों में पानी का बहाव कम हुआ है। जलवायु परिवर्तन से 2023 तक 1.5 से 4.0 डिग्री सेल्सियस तापमान बढऩे से 1 से 26 प्रतिशत बर्फ की परत में कमी पाई गई है, जिससे प्रदेश की चार प्रमुख नदियों रावी, ब्यास, चिनाब और सतलुज सहित सहायक नदियों के बेसिन में भी 19 से 23 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। पिछले कुछ वर्षों से अक्तूबर और नवंबर में बर्फबारी शून्य होने और दिसंबर व फरवरी के बीच बर्फबारी की कमी से तामपान भी बढ़ रहा है।
मिट्टी की पकड़ ढीली, भूस्खलन बढ़ा
जलवायु के आधार पर प्रदेश को चार जोन में बांटा गया है। ऊंचाई वाले क्षेत्र को जोन चार में रखा गया है। इस जोन में बर्फबारी की कमी से ढीली मिट्टी में पकड़ नहीं है