इंश्योरेंस मोड पर चलेगी हिम केयर
विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे
कैबिनेट सब-कमेटी ने की महत्त्वपूर्ण सिफारिश, प्रीमियम पर लिया जाएगा फैसला
हिमाचल में पूर्व भाजपा सरकार की कैशलेस हेल्थ कवर वाली हिम केयर योजना को अब इंश्योरेंस मोड पर चलाया जा सकता है। यह योजना अब स्टेट फंड के बजाय हेल्थ बीमा की तरह किसी बीमा कंपनी के माध्यम से चलेगी। यह सिफारिश कैबिनेट सब-कमेटी ने राज्य सरकार को की है। इस योजना के लंबित भुगतान और स्कीम की खामियों को देखते हुए कैबिनेट सब कमेटी को यह सुझाव अफसरों ने दिया था। अब राज्य सरकार को इस बारे में फैसला लेना है। पिछले महीने तक हिम केयर में कुल लंबित भुगतान करीब 400 करोड़ से ज्यादा था, जबकि आयुष्मान भारत स्कीम में भी 100 करोड़ से ज्यादा पेंडेंसी चल रही थी। इन दोनों योजनाओं में हिमाचल में 39 लाख की आबादी कवर्ड है। दोनों ही योजनाओं में प्रति परिवार साल में पांच लाख तक का मुफ्त इलाज है। हिमाचल में 292 पैनलबद्ध अस्पतालों में यह इलाज मिलता है। इनमें से 146 प्राइवेट अस्पताल हैं। पिछले साल तक इन दोनों योजनाओं में 10.33 लाख क्लेम सेटल किए जा चुके हैं, जिन पर 1223 करोड़ का खर्चा हुआ है। इसके बाद राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों में सिलेक्टिव सर्जरी और अन्य इलाज रोक दिया था और सिर्फ डायलिसिस को ही अनुमति दी है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में हिम केयर योजना पर एक कैबिनेट सब-कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में भी अधिकारियों ने तर्क दिया कि स्टेट फंड से इस योजना को चलाना मुश्किल है, क्योंकि खामियां दूर नहीं हुई हैं। यदि बीमा कंपनी के माध्यम से योजना को चलाया जाए, तो स्क्रीनिंग करना बीमा कंपनी का काम हो जाएगा। इसके लिए प्रीमियम सरकार देगी या लोगों को खुद देना होगा, इस पर फैसला अभी होना है।
