Himachal Pradesh

अनुदान काटने का केंद्र का बहाना नहीं चलेगा, CM के अफसरों को निर्देश, मजबूत तर्क-मेमोरेंडम बनाएं

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विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अफसरों को दिए निर्देश, मजबूत तर्क और मेमोरेंडम बनाएं
केंद्र सरकार, 16वां वित्तायोग या अन्य कोई भी सेंट्रल एजेंसी हिमाचल को मिलने वाले राजस्व या राजस्व घाटा अनुदान में किसी भी बहाने कटौती करने का कोई प्रयास न कर पाए इसके लिए प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने अभी से कमर कस ली है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने इसके लिए एक अतिरिक्त मेमोरेंडम तैयार करने की जिम्मेदारी अधिकारियों की कमेटी को दी है। इस रिपोर्ट के साथ अगले महीने फायनांस कमीशन में सीएम की बैठक होगी। पहली बार राजस्व घाटा अनुदान को नए तर्क के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है। वित्त आयोग को बताया जाएगा कि हिमाचल के लिए रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट एक अनुदान नहीं, बल्कि पोस्ट डेवोल्यूशन कंपनसेशन यानी मुआवजा है। हिमाचल में अधिकांश रेवेन्यू डेफिसिट इकाइयां ऐसी हैं, जिनका गठन किसी आर्थिक स्वायत्तता या आत्मनिर्भरता के लिए नहीं, बल्कि इन क्षेत्रों के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हुआ है। इसी कारण हिमाचल प्रदेश को स्पेशल कैटेगरी स्टेट बनाया गया है। यह भी तर्क दिया जा रहा है कि हिमाचल सरकार राजस्व घाटा इसलिए भी झेल रही है, क्योंकि केंद्रीय करों की कलेक्शन ज्यादा है। जीएसटी कंपनसेशन भी बंद हो गया है। इसी रिपोर्ट में 14वें और 15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का कंपैरिजन भी जोड़ा जा रहा है।
14वें वित्त आयोग में 2015 से 20 तक हिमाचल को 40624 करोड़ की ग्रांट मिली, जबकि 15वें वित्त आयोग में 2021 से 2026 तक 37199 करोड़ की ग्रांट अवार्ड की गई थी। 15वें वित्त आयोग में सबसे बड़ी दिक्कत इस ग्रांट को टेपर करने के साथ हुई।