ग्रामीण क्षेत्र में भू-अधिग्रहण मुआवजा अब दोगुना, हाई कोर्ट ने रद्द की फैक्टर-वन वाली सरकार की अधिसूचना
हाई कोर्ट ने रद्द की फैक्टर-वन वाली हिमाचल प्रदेश सरकार की अधिसूचना
हिमाचल हाई कोर्ट ने ग्रामीण क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण मुआवजा दोगुना करने के आदेश दिए हैं। सुन्नी डैम प्रभावितों की केस में न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने ये आदेश देते हुए राज्य सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना को भी रद्द कर दिया। यह अधिसूचना पहली अप्रैल, 2015 को जारी की गई थी, जिसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण मुआवजे में फैक्टर वन लगाने को कहा था। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटेलमेंट एक्ट 2013 की मूल भावना के खिलाफ राज्य सरकार ने नोटिफिकेशन की थी। ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र को भूमि अधिग्रहण मुआवजे में एक नहीं माना जा सकता, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि की कीमत कम होती है। अपने फैसले में खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार की अधिसूचना से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों से अन्याय हो रहा है।
इसलिए इस अधिसूचना को रद्द किया किया जाता है। याचिका कर्ताओं को राज्य सरकार फेक्टर-2 के हिसाब से 30 सितंबर 2025 से पहले सभी जरूरी लाभ जारी करे। यह फैसला बेशक सुन्नी डैम प्रभावितों के मामले में आया है, लेकिन राज्य सरकार ने 2015 से सभी सरकारी भूमि अधिग्रहण इसी अधिसूचना के अनुसार किये हैं। इसलिए इसी फैसले के आधार पर बाकी परियोजना प्रभावित भी कोर्ट से रिलीफ मांग सकते हैं। इसी अवधि में हिमाचल में बड़े फोरलेन बने हैं, जिनमें हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। इस फैसले के बाद राज्य सरकार पर अब बड़ी देनदारी बन सकती है।
