फिर बदलेगा पंचायती राज अधिनियम, देश में तीन न्याय कानूनों में बदलाव के कारण एक्ट में करना पड़ रहा संशोधन
हिमाचल में इस साल के आखिर में होने जा रहे पंचायती राज चुनाव से पहले हिमाचल प्रदेश पंचायती राज एक्ट-1994 में संशोधन किया जा रहा है। हालांकि इस बार इस संशोधन की वजह चुनाव प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश में बदले गए न्याय कानून हैं। पंचायती राज विभाग का कहना है कि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड के अलावा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम इत्यादि में हुए परिवर्तन के कारण यह संशोधन करना पड़ रहा है। देश में अंग्रेजों के समय से लागू इस कानून के कुछ प्रावधान पंचायती राज एक्ट में जोड़े गए हैं। पंचायत या पंचायती राज प्रतिनिधियों के पास इन्हीं कानूनों के तहत कार्रवाई करने का अधिकार है। मसलन क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की धारा-76 को पंचायती राज एक्ट में भी जोड़ा गया है। इसी तरह पंचायत को धारा 13 और 14 के तहत अपने क्षेत्र में मिनरल्स निकालने के लिए रेगुलेशन बनाने का अधिकार है।
यह आबादी क्षेत्र के 250 मीटर तक होता है। यही वजह है कि इस तरह के काम के लिए पंचायत की एनओसी जरूरी की गई है। पंचायत में सामान्य तरह के विवाद निपटाने से लेकर ग्राम सभा को चलाने के लिए भी इसी तरह के प्रावधानों का इस्तेमाल होता है। अब भारत सरकार ने इंडियन पीनल कोड और क्रिमिनल प्रोसीजर कोड में बदलाव करते हुए नए कानून लाए हैं, जिन्हें लागू कर दिया गया है। इन कानूनों के आने के कारण अब पंचायती राज एक्ट को भी इसी अनुसार बदलना होगा। विभाग ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है और कैबिनेट की आगामी बैठक में इस मसले को भेजा जा सकता है। हिमाचल में इस समय 3615 ग्राम पंचायतें थी, जिनमें से 38 पंचायतों को शहरी क्षेत्र के विस्तार के कारण खत्म कर दिया गया।
