Himachal Pradesh

नहीं मिले जल जीवन मिशन के 1200 करोड़, Deputy CM ने की समीक्षा, अफसरों को दिए ये निर्देश

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उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने की जलशक्ति विभाग की समीक्षा, अफसरों को फील्ड में जाने के निर्देश
हिमाचल प्रदेश को जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार से पूरी राशि नहीं मिल पाई है। बार-बार दिल्ली जाकर पैसे की डिमांड करने के बावजूद 1200 करोड़ रुपए नहीं मिल पाए हैं, जिससे यहां जल जीवन मिशन के काम प्रभावित हो रहे हैं। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने शनिवार को जलशक्ति विभाग की समीक्षा बैठक ली, जिसमें जल जीवन मिशन को लेकर हुई चर्चा में बजट का मामला सामने आया। इसके साथ उपमुख्यमंत्री ने जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को फील्ड में जाने के निर्देश दिए हैं। समीक्षा बैठक में जलशक्ति विभाग से संबंधित विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। उपमुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में जलशक्ति विभाग से संबंधित सभी लंबित परियोजनाओं व कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।
मुकेश अग्निहोत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह समय-समय पर अपने-अपने कार्यक्षेत्र फील्ड में जाएं और निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाए और उसकी रिपोर्ट अपने उच्च अधिकारी को प्रस्तुत करें। जल जीवन मिशन के तहत केंद्र से 6300 करोड़ की स्वीकृत राशि में से सिर्फ 5100 करोड़ की राशि अभी तक प्राप्त हुई है और 1200 करोड़ की स्वीकृत राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। वर्ष 2024-25 में 920 करोड़ स्वीकृत हुए थे, परंतु राज्य को केवल 137 करोड़ की स्वीकृत राशि ही प्राप्त हुई है। 783 करोड़ की राशि अभी तक केंद्र सरकार से प्राप्त नहीं हुई है। बैठक में सचिव जलशक्ति, राखिल काहलों, वरिष्ठ सलाहकार नरेंद्र मोहन सैनी, मुख्य अभियंता मंडी जोन उपेंद्र वैद्य, मुख्य अभियंता शिमला जोन अनिल मेहता, मुख्य अभियंता धर्मशाला दीपक गर्ग, मुख्य अभियंता हमीरपुर जोन रोहित दुबे, मुख्य अभियंता व निदेशक एसडब्लूएसएम हेमंत तनवर, मुख्य अभियंता मुकेश हीरा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
नियमित होंगे जलरक्षक, कैबिनेट में जाएगा मामला
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जल शक्ति विभाग में जिन जल रक्षकों को सेवाएं प्रदान करते हुए 12 साल हो गए हैं, उनकी रिपोर्ट शीघ्र बनाकर इसे कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। जल्दी ही सरकार इन जलरक्षकों को नियमित करने पर फैसला लेगी।