पांच माह के लिए बन्द हुए भगवान कार्तिक स्वामी मंदिर कुगति के कपाट ……
उत्तरी भारत के प्रसिद्ध शिव पुत्र कार्तिक स्वामी मंदिर कुगती के कपाट बुधवार को विधिवत तरीके से बंद हो गए है। अगले वर्ष बैसाखी की संक्रांति के दिन इस मंदिर के कपाट विधिवत तरीके से खुलेंगे। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को पुजारी व भक्तों संग हर वर्ष बड़ी धूमधाम से मनाया जाता रहा है। लिहाजा बुधवार को विधिवत पूजा अर्चना के बाद इस ऐतिहासिक भगवान कार्तिकेय मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं। मान्यता के अनुसार यहां पर बर्फ पड़ जाने के बाद देवी शक्ति स्वर्ग लोक की ओर चले जाते हैं। इसके बाद यहां पर श्रद्धालु व भक्तों का आना जाना पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाता है। मान्यता के अनुसार मंदिर के कपाट बंद हो जाने के बाद यहां जाने वाले के साथ अनहोनी भी हो सकती है। मान्यता के अनुसार यहां पर भक्तों संग मंदिर के पुजारी एक गढवे में पानी रखते हैं। और यह मान्यता है कि 5 महीने बाद जब मंदिर के कपाट खुलेंगे तो अगर गढ़वे का पानी पूरी तरह भरा हुआ ही रहा तो चारों तरफ हरियाली सुख समृद्धि अच्छी फसल का अंदेशा जताया जाता है। वही अगर गढवे में पानी आधा हो गया तो उस वर्ष अनहोनी प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बनी रहती है ।आपको बता दें कि यहां पर हर वर्ष हजारों श्रद्धालु शीश नवाने जाते हैं। भगवान कार्तिकेय स्वामी के प्रति जिला चंबा में लोगों की गूढ आसथा है । वह यहां हर वर्ष देश विदेश से हजारों श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते हैं। बैसाखी की संक्रांति के दिन इस मंदिर के कपाट खुलेंगे और उस दिन हजारों की संख्या में भगत इस दृश्य को देखने के लिए यहां पर जमा होते हैं।
