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निष्पक्ष चुनाव नहीं चाहती सरकार, चुनाव आयुक्त अरुण गोयल के इस्तीफे के बाद कांग्रेस हमलावर

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ट्राइबल टुडे न्यूज़
अरुण गोयल के चुनाव आयुक्त पद से अचानक इस्तीफा देने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने सवाल किया कि क्या उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त या नरेंद्र मोदी सरकार से मतभेद के चलते ऐसा कदम उठाया? जयराम रमेश ने पूछा कि क्या गोयल ने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया है जैसा कि उन्होंने अपने त्याग पत्र में बताया है या फिर वजह कुछ और है। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि क्या कोलकाता हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय की तरह गोयल भी भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लडऩे जा रहे हैं? कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट ) के मुद्दे पर बात करने के लिए इंडिया दलों को मौका नहीं दिया है।

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि अगर संस्थाओं की बर्बादी को नहीं रोका गया तो लोकतंत्र पर तानाशाही का कब्जा हो जाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट किया कि भारत में अब केवल एक चुनाव आयुक्त है, जबकि कुछ ही दिनों में लोकसभा चुनावों की घोषणा होनी है। क्यों? जैसा कि मैंने पहले कहा है, अगर हम अपने स्वतंत्र संस्थाओं की सुनियोजित बर्बादी को नहीं रोकते हैं, तो तानाशाही द्वारा हमारे लोकतंत्र पर कब्जा कर लिया जाएगा। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी कहा कि निर्वाचन आयोग के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। वेणुगोपाल ने पोस्ट किया, ‘दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सेहत के लिए यह बेहद चिंताजनक बात है कि चुनाव आयुक्त अरुण गोयल ने लोकसभा चुनाव के ठीक पहले इस्तीफा दे दिया है।