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घर के भेदी को भेदना कांग्रेस की चुनौती

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उपचुनाव में भाजपा में शामिल हुए बागी नेताओं से होगा मुकाबला
ट्राइबल टुडे

कांग्रेस के लिए उपचुनाव में बड़ी चुनौती एक भी सीट न गंवाने की है। उपचुनाव में अंदर और बाहर कांग्रेस का अपनों से ही मुकाबला होना है। जिन नेताओं ने कांगे्रस की टिकट पर चुनाव लड़ा था, अब पार्टी की लड़ाई उनसे ही होने वाली है। कांग्रेस के लिए बड़े खतरे की बात अब घर के भेदी से बचने की भी है। जो नेता भाजपा का चोला ओढ़ चुके हैं, वे कांग्रेस की ताकत और कमजोरी दोनों को अच्छी तरह से जानते हैं। पार्टी उन्हीं सीटों के लिए लड़ रही है, जो डेढ़ साल पहले पार्टी ने बड़े वोट शेयर से जीती थी। धर्मशाला में 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ते हुए सुधीर शर्मा को 27 हजार 323 मत हासिल किए थे, जबकि भाजपा के राकेश चौधरी को 24 हजार 38 वोट मिले थे। चुनाव में कांग्रेस 45 और भाजपा को 40 फीसदी वोट शेयर रहा था। लाहुल-स्पीति में कांग्रेस की टिकट पर रवि ठाकुर 9948 और उस समय भाजपा के पूर्व मंत्री रामलाल मार्कंडेय को 8332 वोट हासिल हुए थे। कांग्रेस के खाते में यहां 51.91 फीसदी वोट आए थे।
सुजानपुर में कांग्रेस की टिकट पर राजेंद्र राणा को 27 हजार 679 और भाजपा के रणजीत सिंह राणा को 27 हजार 820 वोट मिले थे। इस सीट पर कांग्रेस का वोट शेयर 49.79 तो भाजपा का 49.07 प्रतिशत था। बड़सर में कांग्रेस की टिकट पर इंद्रदत्त लखनपाल को 30 हजार 293, तो भाजपा की माया शर्मा को 16 हजार 501 वोट मिले थे। कांग्रेस का वोट शेयर 48.16, जबकि भाजपा का 26.23 फीसदी था। गगरेट से चैतन्य शर्मा को 40 हजार 767, तो भाजपा के राजेश ठाकुर को 25 हजार 82 वोट मिले थे। इस सीट पर कांग्रेस ने 61.15, तो भाजपा के खाते में 37.62 फीसदी वोट आए थे। कुटलैहड़ में देवेंद्र भुट्टो को 36 हजार 636 वोट, तो भाजपा के पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर को 29 हजार 57 वोट मिले थे। कुटलैहड़ में कांग्रेस का वोट शेयर 54.84 प्रतिशत तो भाजपा का 43.49 प्रतिशत था। अब कांग्रेस के लिए इन सभी सीटों पर अपना मत प्रतिशत बरकरार रखना बड़ी चुनौती है।