गोबर से बनाया साबुन-वॉशिंग पाउडर
संवाददाता विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे
कंडाघाट के कोठी गांव की महिलाओं ने तैयार किए प्रोडक्ट, धीरे-धीरे बढऩे लगी डिमांड
कंडाघाट विकास खंड की ग्राम पंचायत देलगी के कोठी गांव की महिलाएं बेरोजगारों के लिए एक मिसाल बनकर उभरी है । इन महिलाओं ने गाय के गोबर का इस्तेमाल कर अपनी आजीविका को बढ़ाया है। कोठी गांव की जागृति महिला स्वयं सहायता समूह ने गाय के गोबर से साबुन, धूप, वॉशिंग पाउडर, शेम्पू, धार्मिक सामग्री, हवन सामग्री सहित राखियां बना उसे मार्केट में उतार दिया है। महिलाओं की माने तो इन प्रोडक्ट को बनाने के लिए कई प्रकार की जड़ी-बूटियों का भी प्रयोग किया गया है।
धार्मिक सामग्री में राधा-कृष्ण की तस्वीर, लक्ष्मी के पैर भी गाय के गोबर से बनाए गए हैं, जो देखने में बहुत ही आकर्षक है। स्थानीय प्रशासन की तरफ से सप्ताह में एक दिन पुराने डीसी ऑफिस कार्यालय के पास महिलाओं को स्टॉल लगाने के लिए दी जाती है। इन्हीं प्रोडक्ट को बेचकर प्रति महीना समूह 10 से 15 हजार रुपए की इनकम भी जनरेट कर रहा है। इन सभी प्रोडक्ट्स को बनाने के लिए महिलाओं ने कई प्रकार की मशीनों को भी खरीदा है।
ऐसे बनता है साबुन
ऐसा नहीं है कि साबुन बनाने के लिए सिर्फ गोबर का इस्तेमाल होता है। इसमें गोबर के अलावा जट्टामासी, पंचगव्य, दूध, घी, एलोवेरा, मैदा, लकड़ी का पाउडर भी यूज किया जाता है। इसके पूरे मिक्सर से साबुन तैयार किया जाता है। इसी प्रकार वॉशिंग पाउडर बनाने के लिए डोलामाइट पाउडर, एसएलएस ब्लैक सैलरी, नमक को मिक्स किया जाता है।
हैंड वॉश और फिनायल
जागृति महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा इसके अलावा हैंड वॉश और फिनायल भी तैयार किया जाता है। हैंड वॉश में पंचगव्य तो फिनाइल में चीड़ का तेल डालकर उसे बनाया जाता है।
