Education

अब सीबीएसई स्कूलों में सिखाई जाएगी मातृभाषा

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प्री-प्राइमरी और प्राइमरी क्लासेस के बच्चों को पढ़ाने के निर्देश
डायरेक्टर बोलीं, दस भाषाओं के स्टडी मटेरियल तैयार
एनसीईआरटी-आईआईएल मिलकर तैयार करेंगे 52 भाषाओं के प्राइमर

संवाददाता संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे,
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने देश के सभी स्कूलों को प्री प्राइमरी और प्राइमरी क्लासेस के बच्चों को लिए रीजनल लैंग्वेज में एजुकेशनल मटेरियल की मदद से पढ़ाने का निर्देश दिया है। सीबीएसई ने हाल ही में इसे लेकर सर्कुलर जारी किया है। इसके मुताबिक, स्कूल की शुरुआती शिक्षा बच्चे की मातृभाषा या रीजनल भाषा में ही होनी चाहिए। इसके लिए सीबीएसई खासतौर पर मटेरियल भी डिजाइन किया जा रहा है। ये मटेरियल तीन से आठ साल की उम्र के बच्चों के लिए बनाया जा रहा है। इसे लैंग्वेज प्राइमर का नाम दिया गया है। सीबीएसई ने कहा है कि स्कूलों को नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क को ध्यान में रखते हुए बन रहेमटेरियल की मदद से रीजनल भाषाओं में एजुकेशनल पढ़ाई शुरू कर देनी चाहिए।
सीबीएसई की एकेडमिक्स विंग की डायरेक्टर प्रज्ञा एम सिंह ने कहा कि नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ लैंग्वेजेस ने देशभर में बोली जाने वाली 52 भाषाओं में प्राइमरी स्कूलों के बच्चों के लिए एजुकेशनल मटेरियल तैयार करने के लिए कोलैब किया है। प्रज्ञा सिंह ने कहा कि देश में अलग-अलग भाषाओं की विविधता को बनाए रखने और बच्चों का फाउंडेशन मजबूत करने के लिए ये कदम उठाया गया है। सीबीएसई की एकेडमिक्स डायरेक्टर प्रज्ञा एम ने बताया कि भुतिया, बोडो, गारो, खंदेशी, किन्नौरी, कुकी, मणिपुरी, नेपाली, शेरपा और तुलुगू भाषाओं के लिए मटेरियल तैयार हो चुका है। इस मटेरियल में इन भाषाओं के अल्फाबेट