Himachal Pradesh

16th Finance Commission: आंकड़ों में दिखाई दी हिमाचल की असलियत

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घट रहीं सरकारी नौकरियां, वेतन पर खर्चा नियंत्रण से बाहर

16वें वित्त आयोग के सामने रखे गए आंकड़ों में दिखाई दी हिमाचल प्रदेश की असलियत, आने वाला समय चुनौतियों से भरा

संवाददाता विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे,

हिमाचल में सरकारी नौकरी की इच्छा पाले युवाओं के लिए 16वें वित्त आयोग को दिए गए आंकड़ों में बहुत कुछ है। एक तरफ सरकारी रोजगार में नेगेटिव ट्रेंड है और दूसरी तरफ सैलरी का खर्चा आउट ऑफ कंट्रोल होता जा रहा है। भविष्य में सरकारी रोजगार कैसा रहेगा, इसकी झलक भी इन्हीं आंकड़ों में है। राज्य सरकार ने वित्त आयोग को दिए मेमोरेंडम में कहा है कि पिछले तीन साल से सरकारी कर्मचारियों की संख्या में नेगेटिव ट्रेंड है और सैलरी पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करने के कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद नए फायनांस कमीशन के पांच वर्षों के लिए सिर्फ सैलरी पर ही 1.22 लाख करोड़ खर्च होने का आकलन है। राज्य सरकार ने अपने मेमोरेंडम में कहा है कि हिमाचल में एंप्लॉई पापुलेशन रेशो सबसे ज्यादा है। कर्मचारियों के वेतन पर खर्च हो रही धनराशि में से सबसे ज्यादा 60 फीसदी शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों में खर्च हो रहा है।

वर्ष 2018-19 से अब तक कर्मचारियों की संख्या में तीन फीसदी की कटौती हुई है। इसके बावजूद कर्मचारी वेतन राज्य सरकार के रिवेन्यू एक्सपेंडिचर का सबसे बड़ा स्टैंडर्ड ऑब्जेक्ट है। राज्य सरकार ने तर्क दिया है कि वर्ष 2017-18 से 2024-25 तक कर्मचारी वेतन में 59 फीसदी की वृद्धि हुई है। इसकी वजह संशोधित वेतन आयोग, महंगाई भत्ता, वार्षिक वेतन वृद्धि और कॉन्ट्रैक्ट से नियमितीकरण है। हालांकि अभी राज्य सरकार नए भत्ते नहीं दे पाई है और सिर्फ फंक्शनल पदों को ही भरा जा रहा है। 16वें फायनांस कमीशन की अवधि यानी वर्ष 2026 से 2031 के बीच यह खर्च लगभग दोगुना हो जाएगा। राज्य सरकार को ये आंकड़े फायनांस कमिशन में इसलिए रखने पड़े हैं, क्योंकि 2026 के बाद राजस्व घाटा अनुदान को बचाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। ये पांच साल इसी केंद्रीय अनुदान के सहारे निकलेंगे।