Himachal Pradesh

250 से ज्यादा आबादी वाले 219 गांव आज भी पैदल

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संवाददाता विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे,

हिमाचल में 250 से ज्यादा आबादी वाली 219 गांव अब भी सडक़ से दूर हैं। इन आबादी को सडक़ से जोडऩे के लिए एक से छह किलोमीटर तक सडक़ की जरूरत है। इन बस्तियों की खोज पीडब्ल्यूडी ने की है और ये आंकड़े केंद्र सरकार को प्रस्तावित किए गए हैं। भविष्य में केंद्र सरकार 250 की आबादी वाले गांव को सडक़ से जोडऩे का फैसला करती है, तो इसमें ये इलाके भी सडक़ से जुड़ जाएंगे। फिलहाल, पीएमजीएसवाई के चौथे चरण के तहत जुटाए जा रहे आंकड़ों में इन बस्तियों का खुलासा हुआ है। ज्यादातर बस्तियां ग्रामीण इलाकों में हैं और इनकी छंटनी पीडब्ल्यूडी ने 2011 की जनगणना के आधार पर की है। ये आंकड़े केंद्र सरकार को भेजे जा रहे हैं, ताकि इन बस्तियों को सडक़ से जोडऩे का प्रयास किया जा सके। राजधानी होने के बावजूद शिमला सडक़ से दूर आबादी वाली लिस्ट में तीसरे पायदान पर है। शिमला में 40 ग्रामीण इलाके अब भी ऐसे हैं, जहां लोग मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए अधिकतम छह किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर हैं।

पीडब्ल्यूडी की इस लिस्ट में आठ जिलों में 250 से अधिक आबादी वाले गांव को शामिल किया गया है। इसमें पहले पायदान पर बिलासपुर शामिल है। बिलासपुर में सबसे ज्यादा 57 गांव ऐसे हैं, जहां अभी तक सडक़ नहीं पहुंची है। इन गांव में 2011 की जनगणना के अनुसार आबादी 250 से 400 के बीच है। मंडी में अभी भी 43 गांव बिना सडक़ के हैं। ये गांव प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के पहले व दूसरे चरण का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। इस सूची में शिमला के 40 गांव शामिल हैं और राजधानी पूरे हिमाचल में तीसरे नंबर पर है। वहीं चंबा में 33, कुल्लू में 21, कांगड़ा में 11, सिरमौर में 7 और सोलन में 2 गांव अभी भी सडक़ से दूर हैं। (एचडीएम)

पीएमजीएसवाई के चौथे चरण पर मंथन

दिल्ली में प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के चौथे चरण पर मंथन चल रहा है। इस कड़ी में 250 की आबादी वाले गांव को सडक़ से जोडऩे की योजना पर केंद्र सरकार काम कर रही है। पीएमजीएसवाई के चौथे चरण का ऐलान होता है तो प्रदेश के यह सभी 219 गांव सडक़ से जुड़ सकते हैं और इसका बड़ा फायदा बिलासपुर जिला को मिलता हुआ नजर आ रहा है। बिलासपुर में 57 गांव ऐसे हैं, जो सडक़ से दूर हैं। पीडब्ल्यूडी इन गांवों की लिस्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेज रहा है। पीएमजीएसवाई के चौथे चरण की शुरूआत के साथ ही हिमाचल को इन गांवों के चयन से बड़ा फायदा मिलने की संभावना है।