Himachal Pradesh

बैंक सहयोग करे, तो 15 साल में भर देंगे सारा कर्ज

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करोड़ों की चपत के बाद पीडि़त की प्रशासन से गुहार

13 करोड़ 95 लाख 22 हजार की मूल राशि जो ब्याज सहित अब 23 करोड़ को पार कर चुकी है कि चपत लगने के बाद अब बैंकों के शिकंजे से आहत नगरोटा बगवां की पीडि़त फर्म ने उन बैंकों से सहयोग की अपील की है, जिनसे ऋण लेकर मोटी कमाई के लालच में करोड़ों लुटा बैठे । हालांकि पुलिस ने ठगी के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन पीडि़त फर्म ने गिरफ्तार आरोपी के अलावा नगरोटा बगवां तथा धर्मशाला के दो अन्य लोगों को भी मामले में बराबर का दोषी बताया है। गत 27 अप्रैल को दर्ज प्राथमिकी में भी पीडि़त शिकायतकर्ता ने कुल चार लोगों को आरोपी बनाया है । पुलिस ने तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा-420 ए 120 बी तथा 417 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी । मुंबई के सिसोदिया ट्रेडर्ज के सर्वदमन सिसोदिया की चंडीगढ़ से गिरफ्तारी के बाद पत्रकारों के सामने आए पीडि़त, शिकायतकर्ता एवं उनके वित्तीय सलाहकारों ने यह खुलासा किया कि कि किस तरह वे जालसाजी का शिकार हुए।

उन्होंने तथाकथित कंपनी में भरोसा दिलवाने के लिए स्वयं भी पांच करोड़ लगाने तथा उससे अच्छी खासी रिटर्न मिलने का भी प्रलोभन दिखाया। लंबी जद्दोजहद और भावी सब्जबागों के वशीभूत उन्होंने मार्च 2017 से नवंबर 2019 तक अलग-अलग बैंकों से ऋण लेकर 13 करोड़ 95 लाख 20 हजार मुख्य आरोपी को देने की बात कही। इसी बीच आरोपियों ने एक शपथ पत्र देकर भी उनकी रकम को सुरक्षित होने की बात कही जबकि एक बार दोनों स्थानीय लोगों के माध्यम से उन्हें करीब 66 लाख की रकम नकद भी दी गई।

छह बैंकों से उठाया पैसा

पीडि़त का कहना है कि उन्होंने सारे पैसे का जुगाड़ छह बैंकों से ऋण लेकर किया, जिसे अब थोड़ा-थोड़ा भरा जा रहा है। एक बैंक की ऋण राशि सबसे अधिक है की किश्तों में बिलंब के चलते कार्रवाई की तलवार भी लटक गई है। इससे उनकी आर्थिक विश्वसनीयता को चोट पहुंची है तथा वे अपने मौजूदा व्यवसाय के लिए धन की व्यवस्था करने में असमर्थ हैं क्योंकि मुख्य आरोपी के साथ निवेश के लिए प्राप्त हमारा बैंक ऋण खाता डिफाल्टर घोषित कर दिया है, जबकि गारंटी के तौर पर निजी प्रॉपर्टी पर बिक्री की तलवार लटकी है ।

500 परिवारों पर संकट

पीडि़त का कहना है कि उन्होंने बैंक को कहीं ज्यादा प्रॉपर्टी की गारंटी दी है तथा बैंक की राशि सुरक्षित है बशर्ते बैंक उन्हें किश्तों में ऋण लौटाने की मोहलत दे । अगर नियमित कार्रवाई अमल में लाई जाती है, तो न केवल फर्म की साख खराब होगी बल्कि एक साथ 500 परिवारों की रोजी रोटी पर भी संकट आ जाएगा । पीडि़त ने पुलिस में दर्ज करवाई गई रिपोर्ट में चारों आरोपियों से रकम वसूली की गुहार लगाई है क्योंकि उनका कहना है कि बैंक लेनदेन के दस्तावेजों ओर साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि रकम कब-कब किसके खाते में गई है । थाना प्रभारी रमेश ठाकुर का कहना है कि पुलिस मामले को लेकर गंभीर है तथा हर संभव कार्रवाई कर रही है।