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हिमाचल में भारी बारिश का अ*लर्ट,

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24 घंटे में कई जगह भारी वर्षा ने रोके जिंदगी के कदम, लाहुल के दारचा-शिंकुला में बाढ़

विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे

जुलाई माह में शिमला-कुल्लू को छोड़़ प्रदेश में सुस्त पड़ी मानसून की रफ्तार अगस्त माह में जानलेवा होने लगी है। 24 घंटों में कई जगह भयंकर बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे ज्यादा नुकसान लाहुल-स्पीति के शिंकुला-दारचा क्षेत्र में हुआ है। यहां भयंकर बाढ़ से दारचा- शिंकुला मार्ग का 200 मीटर हिस्सा बह गया है। सिरमौर और किन्नौर जिलों में भी मानसून ने अपने तेवर दिखाएं हैं। अगले सप्ताह 16 अगस्त तक प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी हुआ है। यलो अलर्ट के साथ मौसम विज्ञान केंद्र ने पूर्वानुमान दिया है कि प्रदेश के लगभग सभी इलाकों में बारिश का दौर जारी रहेगा और कांगड़ा, मंडी, शिमला, सोलन व सिरमौर में भारी बारिश की चेतावनी है। भारी बारिश के चलते लाहुल घाटी के दारचा- शिंकुला सडक़ मार्ग पर फिर बाढ़ आ गई। बाढ़ के साथ आई बड़ी- बड़ी चट्टानों ने सडक़ का लगभग 200 मीटर भाग क्षतिग्रस्त कर दिया। सडक़ क्षतिग्रस्त होने से लद्दाख के जंस्कर वेली का लाहुल और मनाली से सडक़ संपर्क कट गया है।

कडक़ती धूप से ग्लेशियर के पिघलने की रफ्तार भी तेज हुई है। शुक्रवार को खिली धूप के बीच आई बाढ़ ने जंस्कर के लोगों की दिक्कत बढ़ा दी। जंस्कर से मनाली जा रहे कुछ लोग जान जोखिम में डाल कर पैदल नाला पार कर दारचा पहुंचे। शिंकुला के साथ-साथ लाहुल-स्पीति में भी जगह-जगह नालों में बाढ़ आ रही है। वाहन चालक टशी, तेंजिन और सुरेश ने बताया कि शुक्रवार सुबह ही बीआरओ ने इस मार्ग को बहाल किया था, लेकिन शाम सात बजे फिर से भयंकर बाढ़ आ गई। उन्होंने बताया कि इस नाले पर लगातार बाढ़ आ रही है, जिससे मार्ग क्षतिग्रस्त हो रहा है। दूसरी ओर मायड़ घाटी में 10 दिन बाद ही सडक़ बहाल हो पाई है। सडक़ बंद होने से पर्यटन प्रभावित हुआ था, लेकिन अब सभी को राहत मिली है। उदयपुर किलाड़ मार्ग पर भी आवाजाही सामान्य है। शनिवार को दर्जनों वाहन मनाली से उदयपुर होते हुए किलाड़ रवाना हुए। बीआरओ के एक अधिकारी ने बताया कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में बीआरओ ने अपनी मशीनों को तैनात कर रखा है। प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान सबसे अधिक बारिश नाहन में दर्ज की गई है। नाहन में 168.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि संधोल में 106.4, नगरोटा सूरियां में 93.2, धौलाकुआं में 67.0, जुब्बड़हट्टी में 53.2, कंडाघाट में 45.6, धर्मशाला में 13.0, कांगड़ा में 12.6 व नारकंडा में 19.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। प्रदेश में जगह-जगह भू-स्खलन से प्रदेश में 50 से अधिक सडक़ें व पेयजल योजनाएं भी ठप हैं।

कई भागों में बिजली आपूर्ति ठप है। शनिवार को सिरमौर के साथ शिमला में भी भारी बारिश हुई। शिमला की सडक़ों पर भारी पानी से चलना मुश्किल रहा। कालका-शिमला फोरलेन को जगह-जगह भूस्खलन के चलते परवाणू से धर्मपुर तक वन-वे किया गया है। नेशनल हाईवे-707 भूस्खलन के चलते सतौन से तीन किलोमीटर आगे शिलाई की ओर बाधित रहा, जिससे लोग परेशान हैं। जनजातीय जिला किन्नौर के निगुलसरी में एनएच-पांच भी प्रभावित हुआ है, जहां लगातार पहाड़ी से भूस्खलन हो रहा है। यहां लगातार भारी चट्टाने गिरने से किन्नौर और काजा का शिमला से संपर्क 24 घंटे तक कटा रहा। मंडी जिला के कीरतपुर-मनाली फोरलेन में सुंदरनगर के चमुखा स्थित पेट्रोल पंप के पास पहाड़ी से भारी भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा गिरने के कारण पेट्रोल पंप को नुकसान पहुंचा है। अभी इस भूस्खलन में किसी व्यक्ति के हताहत होने की कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस थाना सुंदरनगर की टीम ने मौके पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया।

शिमला-किन्नौर एनएच 24 घंटे बंद रहा

भावानगर। निगुलसरी स्लाइडिंग प्वाइंट में अवरुद्ध एनएच 05 लगभग 24 घंटे बाद यातायात के लिए बहाल कर दिया गया है। हालांकि पहाड़ी से पत्थर गिरने का सिलसिला अभी भी नहीं थमा है, जिसके चलते यातायात नियंत्रित करने के लिए पुलिस व होमगार्ड जवान स्लाईडिंग प्वाइंट के दोनों ओर तैनात कर दिए गए हैं। विभाग द्वारा शनिवार सुबह से ही मार्ग बहाली की कार्य शुरू कर दिया गया था, परंतु बार-बार चट्टानों के गिरने से विभाग को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बहरहाल दोपहर बाद करीब चार बजे मार्ग को पूरी तरह बहाल कर यातायात सुचारू किया गया। यहां लगातार भारी चट्टानें गिरने से किन्नौर और काजा का शिमला से संपर्क 24 घंटे तक कटा रहा।