स्कूल को खा गई फोरलेन; अब उधार के टूटे फूटे भवन में हो रही पढ़ाई, वहां भी टायलेट नहीं
कांगड़ा के मलां प्राइमरी स्कूल में नौनिहाल असुरक्षित कमरों में पढऩे के लिए मजबूर
विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे
फोरलेन-एनएचएआई की करतूत तो देखिए, फोरलेन का काम तो शुरू किया नहीं, पर शिक्षा का मंदिर जरूर तोड़ दिया। यदि टूटे-फूटे स्कूल में छात्र पढ़ाई करते हों और बच्चों के लिए टायलेट की सुविधा भी न हो, तो बेहतरीन शिक्षा के क्या मायने और उस ‘मन की बात’ का भी क्या अर्थ, जो परीक्षा से पूर्व छात्रों से की जाती है। वर्तमान दौर में जहां नेताओं के प्रस्तावित दौरों पर प्रशासन द्वारा सजावटी तामझाम तथा ढांचागत संरचना खड़ी करने के लिए रातोंरात करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा दिए जाते हों, वहां यदि स्कूल में शौचालय की व्यवस्था के लिए दर-दर भटकना पड़े, तो ऐसे सिस्टम पर सवाल उठना स्वाभाविक हैं। ऐसे हालात जिला कांगड़ा के मलां स्थित सरकारी केंद्र प्राइमरी स्कूल के हैं। कुछ माह पहले राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण द्वारा एक हफ्ते के जुबानी नोटिस के बाद फोरलेन की जद में आए सरकारी प्राइमरी स्कूल पर पीला पंजा चला दिया गया। इससे पहले स्कूल प्रबंधन इस बात से पूरी तरह बेखबर था कि उनका परिसर फोरलेन की जद में आएगा।
एनएचएआई की कार्रवाई में स्कूल के चार कमरे, चारदीवारी, किचन तथा शौचालय भी मिट्टी में मिल गए। इस दौरान करीब आठ दशक पूर्व निर्मित स्कूल की बिल्डिंग धराशायी हुई, तो करीब 60 बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था इसी परिसर में उच्च शिक्षा विभाग के वर्षों से बंद पड़े पुराने जर्जर कमरों में कर दी गई। स्कूल ने मजबूरन टपकती छतों के नीचे बच्चों के लिए क्लास रूम सजा दिए, तो कार्यालय के लिए पुरानी जर्जर बिल्डिंग का वह कमरा हिस्से आया, जहां कंकरीट का प्लस्तर कभी सिर पर चोट कर सकता था।
