Himachal Pradesh

प्रदेश में पहले दिन 31.8677 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन

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गोबिंदसागर में 15.2183 मीट्रिक टन; कोलडैम में 0.066, पौंग में 16.4014, चमेरा-रणजीत सागर से 0.182 मीट्रिक टन पकड़ी

गोबिंदसागर में दाड़ी भाड़ी सभा ने पकड़ी 33.5 किलो वजन की सबसे बड़ी मछली

संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे,

प्रदेश में दो माह के अंतराल के बाद जलाशयों में मत्स्य आखेट शुरू हो गया। पहले दिन जलाशयों में 31.8677 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन दर्ज किया गया। इसके तहत गोबिंदसागर में 15.2183 मीट्रिक टन, कोलडैम से 0.066, पौंग से 16.4014 तथा चमेरा व रणजीत सागर से 0.182 मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया। खास बात यह है कि गोबिंदसागर में सिल्वर व मिरर कार्प, पौंग में सिंघाड़ा व रोहू प्रजाति की मछलियां, कोल डैम में मिरर कार्प और चमेरा व रणजीत सागर सेे सिल्वर कार्प प्रजाति की मछलियां पकड़ी गई।

मत्स्य निदेशक विवेक चंदेल ने बताया कि पिछले दो महीनों से जलाशयों में बंद चल रहे मत्स्य आखेट को फिर से खोल दिया गया है। गोबिंदसागर झील में कार्यरत जगातखाना में दाड़ी भाड़ी मत्स्य सहकारी सभा ने 33.5 किलो वजन की 110 सेंटीमीटर लंबी 34 किलो वजन की कतला प्रजाति की एक विशाल मछली पकडऩे में कामयाबी हासिल की है, जबकि दूसरी सबसे बड़ी मछली जबलू सभा ने जगातखाना में 31.5 किलोग्राम की पकड़ी है। इसी तरह कांगड़ा जिला के नगरोटा सूरियां में 25.3 किलो की कतला, देहरा सभा ने 10.2 किलो और फिश लैंडिंग सेंटर देहरा ने 13 किलो की रोहू प्रजाति की मछली पकड़ी है। वर्तमान में प्रदेश के पांच जलाशयों गोबिंदसागर, पौंग, चमेरा, कोलडैम एवं रणजीत सागर का क्षेत्रफल 43785 हेक्टेयर के करीब है, जिसमें 6022 से अधिक मछुआरे मछली पकडऩे का कार्य कर रहे हैं ।

गोबिंदसागर और पौंग में पकड़ी बड़ी मछलियां

गोबिंदसागर से जगातखाना अवतरण केंद्र की दाड़ी-भाड़ी मत्स्य सहकारी सभा के मछुआरे सुभाष चंद द्वारा कतला प्रजाति की 33.5 किलो ग्राम, पौंग से अवतरण केंद्र की नगरोटा सूरियां मत्स्य सहकारी सभा के सुरजन सिंह द्वारा कतला प्रजाति की 25.3 किलो ग्राम, रणजीत सागर से संधारा अवतरण केंद्र की संधारा मत्स्य सहकारी सभा के मछुआरे किशोरी लाल द्वारा सिल्वर कार्प 8.0 किलोग्राम मछली पकड़ी गई।

गोबिंदसागर में 38.29 मीट्रिक टन अधिक उत्पादन

अगस्त 2023 में गोबिंदसागर में 39.25 मीट्रिक टन के मुकाबले अगस्त 2024 में 77.53 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ है, जो कि 38.29 मीट्रिक टन अधिक है।