ओलंपिक संघ की स्पांसरशिप डील में हुआ करोड़ों का घाटा, कैग रिपोर्ट में दावा
कैग रिपोर्ट में दावा; रिलायंस से 59 करोड़ रुपए मिलने थे, 35 करोड़ ही लिए
भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन (आईओसी) के ऊपर अपना ही घाटा करवाने का आरोप लगा है। आरोप कैग की रिपोर्ट से लगा है। आईओसी ने रिलायंस के साथ 2022 से 2030 तक होने वाले 10 मेगा इवेंट्स के लिए स्पांसरशिप डील की थी। इन मेगा इवेंट्स में दो समर ओलंपिक (2024 और 2028), दो एशियन गेम्स (2022 और 2026), दो कॉमनवेल्थ गेम्स (2022 और 2026) के साथ-साथ दो विंटर ओलंपिक (2026 और 2030) और दो यूथ ओलंपिक (2026 और 2030) शामिल हैं। कैग के मुताबिक पूरी डील के लिए आईओसी को 59 करोड़ रुपए मिलने चाहिए थे, लेकिन उसे 35 करोड़ रुपए ही मिले। ओलंपिक एसोसिएशन के सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष पीटी उषा आठ अक्तूबर को इन आरोपों पर जवाब दे सकती हैं। कैग की रिपोर्ट कहती है कि 2022 में जब रिलायंस के साथ डील फाइनल हुई थी, तब इसमें दो विंटर ओलंपिक और दो यूथ ओलंपिक शामिल नहीं थे। तब आईओसी ने छह मेगा इवेंट्स के लिए 35 करोड़ रुपए में डील फाइनल की थी। एक इवेंट के लिए करीब छह करोड़ रुपए की रकम तय हुई थी। 2023 में चार और इवेंट्स के लिए डील एक्सटेंड हुई, लेकिन इसके लिए कोई अतिरिक्त रकम नहीं ली गई। इनमें से हर एक के लिए छह-छह करोड़ रुपए और मिलने चाहिए थे।
यानी 24 करोड़ रुपए और मिलने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आईओसी ने 59 की जगह 35 करोड़ रुपए ही लिए। इस मामले पर कैग ने आईओसी अध्यक्ष पीटी उषा से जवाब मांगा है। उधर, आईओसी अधिकारी अजय कुमार नारंग ने इस मामले पर एसोसिएशन का पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि टेंडर में एक गलती के कारण एग्रीमेंट को दोबारा नेगोशिएट करना पड़ा था। एग्रीमेंट में यह तो लिखा था कि मुख्य स्पांसर ओलंपिक के दौरान इंडिया हाउस बना सकेगा और उसका नाम अपने ऊपर रख सकेगा।
