Himachal Pradesh

सडक़ पर नहीं, ऑटोमैटिक सेंटर में होंगे ड्राइविंग टेस्ट, यहां बनेगा पहला केंद्र

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संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे

हरोली में 10 करोड़ से बनेगा पहला केंद्र; प्राइवेट कंपनियां कर सकती हैं निवेश, फिलहाल आरटीओ सडक़ पर लेते हैं टेस्ट
हिमाचल प्रदेश में ड्राइपिंग टेस्ट अब सडक़ों पर नहीं, बल्कि ट्रैक पर लिया जाएगा। इसके लिए ऑटोमैटिक सेंटर होंगे, जहां पर चालक की दक्षता को देखा जाएगा। यहां कई तरह के मापदंड होंगे, जिनको पार करने के बाद ही कोई चालक बन सकेगा। सरकार की तरफ से उसे तभी ड्राइविंग लाइसेंस मिलेगा, जब इस ट्रैक पर वह खरा उतरेगा। हरोली से इसकी शुरुआत की जा रही है। जानकारी के अनुसार परिवहन विभाग हरोली में ऐसा पहला ऑटोमैटिक सेंटर बनाने जा रहा है, जहां पर लोक निर्माण विभाग विशेष टै्रक बनाकर देगा। इसके लिए 10 करोड़ 23 लाख रुपए की राशि मंजूर हो गई है। अहम बात है कि अभी हरोली में सरकारी क्षेत्र में इस तरह का सेंटर स्थापित करने को मंजूरी मिली है, लेकिन इसके बाद प्राइवेट कंपनियों को भी इस क्षेत्र में निवेश के लिए आगे लाया जाएगा। क्योंकि इस तरह के सेंटर सभी जिलों में बनाए जाएंगे और निजी कंपनियों को विशेष मापदंडों के साथ सेंटर चलाने की मंजूरी दी जाएगी। उनके द्वारा भी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए प्रमाणिकता दी जा सकेगी, जिस पर परिवहन विभाग मुहर लगाएगा।
हालांकि यह भविष्य की बात है, परंतु अभी पहला सेंटर हरोली में बनने जा रहा है। बताया जा रहा है कि परिवहन विभाग के अधिकारियों ने हरोली में इसके लिए जगह का चयन कर लिया है। अधिकारियों ने वहां का दौरा किया है और इसकी फिजिबिलिटी देखी है। अभी इस संबंध में उनकी रिपोर्ट विभाग को जाएगी। उसके आधार पर विभाग आगे बढ़ेगा। यहां ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्ट सेंटर के लिए कई तरह के मापदंड बनाए गए हैं। लाइसेंस बनाने के लिए जो भी जाएगा,