कुल्लू दशहरा श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देने 200 किलोमीटर दूर से आए तीन चंभू देवता
कुल्लू अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में देव रिश्तों से रू-ब-रू हो रहे लोग, इस बार देवसमागम में शामिल हुए 300 देवी-देवता
नेक सिंह ठाकुर ट्राइबल टुडे
भगवान रघुनाथ जी चाकरी के बहाने देश-दुनिया को अपना आशीर्वाद देने के लिए पुराने समय लेकर अब तक देवभूमि कुल्लू के आराध्य देवी-देवता ठारा करडू की सौह में 200 किलोमीटर की दूरी से विराजमान होते हैं। इस बार भी देवभूमि के 300 से अधिक देवी-देवता विश्व के सबसे बड़े देव समागम यानी अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में विराजमान हुए हैं। इनमें सबसे लंबी दूरी के देवी-देवता निरमंड और आनी के हैं। 200 किलोमीटर दूर से आए तीन चंभू देवता भी यहां विराजमान हुए हैं। अपने कारकूनों और हरियानों के साथ कभी संकरे रास्ते, कभी सडक़, कभी खड़ी चढ़ाई वाले पहाड़ीनुमा रास्ते, तो कभी 11000 फीट ऊंचे बशलेऊ दर्रा को पार कर जिला कुल्लू के बाह्य सराज से देवी-देवता दशहरा उत्सव में विराजमान हुए हैं।
देवता चंभू निरमंड, बागा सराहन, बशलेऊ दर्रा और बंजार के बठाहड़ होकर यहां आए हैं। देवभूमि कुल्लू के विजयदशमी उत्सव में जिला कुल्लू के दुर्गम क्षेत्र निरमंड के लगभग आठ देवी-देवता बशेलऊ दर्रा को लांघकर यहां विराजमान हुए हैं। यहां पर अपनी अलौकिक शक्तियों का आह्वान करने के लिए माता अंबिका के चार पुत्रों में से तीन पुत्र देवता चंभू भी विराजमान हुए हैं। ऐसे में श्रद्धालु जब ठारा करडू की सौह में ऐतिहासिक लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र की पीछे सर्कुलर रोड़ में देव दर्शन के लिए जा रहे हैं, तो उन्हें सडक़ के दोनों तरफ चंभू देवताओं के तीन देव रथों के दर्शन करने को मिल रहे हैं। देवता चंभू के अस्थायी शिविर में वीवीआईपी श्रद्धालु से लेकर अन्य कई श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
