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बिना डीपीआर के कैसे सडक़ का निर्माण, HC ने NHAI के उच्च अधिकारी को स्पष्टीकरण के लिए दिए आदेश

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विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोलन से कैथलीघाट तक फोरलेन का निर्माण बिना डीपीआर के किए जाने को गंभीर बताते हुए केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के शपथपत्र से असहमति जताते हुए एनएचएआई उच्चतम अधिकारी को इस संदर्भ में अपना स्पष्टीकरण देने के आदेश जारी किए। कोर्ट ने केंद्रीय सडक़ परिवहन मंत्रालय के सचिव को अपना निजी शपथपत्र दायर कर इस बारे स्थिति स्पष्ट करने के आदेश भी दिए। कोर्ट ने कहा कि बिना डीपीआर के महज व्यवहार्यता के आधार पर कैसे सडक़ का निर्माण किया जा सकता है। कोर्ट मित्र द्वारा कालका-शिमला फोरलेन निर्माण से जुड़ी जनहित याचिका में एक आवेदन दायर कर कोर्ट को बताया था कि सोलन से कैथलीघाट तक का फोरलेन का निर्माण कार्य बिना डीपीआर ही कर दिया गया है।
स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े पद भरने में देरी पर संज्ञान
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े पदों को भरने में देरी पर कड़ा संज्ञान लिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने स्वास्थ्य निदेशक को प्राइमरी हैल्थ सेंटरों में विभिन्न पदों की रिक्तियों सहित पूर्ण ब्यौरा कोर्ट के समक्ष रखने के आदेश दिए। कोर्ट ने यह जानकारी निदेशक को शपथपत्र के साथ पेश करने के आदेश दिए। इससे पहले हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से पूछा था कि प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों समेत अन्य स्टाफ के 1450 रिक्त पड़े पदों को कब तक भर लिया जाएगा। कोर्ट ने सरकार के इन पदों को भरने के लिए अपनाई जा रही टालमटोल रणनीति को स्पष्ट करने को भी कहा था। कोर्ट ने स्टेट्स रिपोर्ट का अवलोकन करने पर पाया कि इसमें उक्त पदों को भरने की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। कोर्ट ने सरकार को पांच नवंबर तक इस बाबत स्थिति स्पष्ट करने के आदेश जारी किए।
शिक्षा विभाग पर 20 हजार रुपए की कास्ट लगाई
विधि संवाददाता — शिमला
कोर्ट के आदेशों की अनुपालना न करने के मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के शिक्षा विभाग पर 20000 रुपए की कास्ट लगाई है। न्यायाधीश रिवाल दुआ ने शिक्षा विभाग पर न्यायालय के पिछले आदेशों की अनुपालना न करने पर यह कास्ट लगाई है। कास्ट की यह राशि प्रार्थी को अदा करने के आदेश जारी किए गए हैं। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थी 10 फरवरी, 2012 को कला अध्यापक के पद पर अनुबंध के आधार पर नियुक्त की गई थी। 31 अगस्त, 2017 को उसकी सेवाओं को नियमित कर दिया गया था। प्रार्थी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर ताज मोहम्मद के मामले में पारित निर्णय के आधार पर अनुबंध की तारीख से वरिष्ठता व अन्य लाभ दिए जाने की न्यायालय से गुहार लगाई थी। हाई कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान प्रार्थी द्वारा शिक्षा विभाग को भेजे गए प्रतिवेदन पर निर्णय लेने के आदेश पारित किए थे, जिसमें प्रार्थी ने शिक्षा विभाग से यह गुहार लगाई थी कि उसे ताज मोहम्मद के मामले में पारित निर्णय के आधार पर वरिष्ठता व अन्य लाभ अनुबंध की तारीख से दिए जाएं।