कहने को तो चंबा मैडिकल कालेज है पर हैरानी की बात है कि कालेज के कई विभागों में स्टाफ की कमी के कारण दूरदराज क्षेत्र से आए मरीजों को धक्के खाने पर मजबूर होना पड़ रहा है कालेज की बीमार व्यवस्था का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चलने फिरने में असमर्थ मरीजों की सुविधा के लिए स्टेचर व व्हील चैयर रखे है उनको चलाने में मरीजों के साथ आए तीमारदारों को कड़ी मशकत करनी पड़ रही है इन स्ट्रेचरों और व्हील चेयरों की हालत ऐसी हैं कि आपातकाल की स्थिति में मरीजों को डाक्टरों तक पहुंचाने में न जाने कितने धके खाने पड़ें तीमारदारों का कहना है कि मैडिकल कालेज में विभिन्न विभागों में डाक्टरों के पद खाली पडे़ हैं वहीं गभीरं रूप बिमारी से ग्रसित मरीजों को या तो प्रशिक्षु डाक्टर के भरोसे छोड़ दिया जाता है या फिर खतरे से बाहर स्थिति होने पर मैडिकल कालेज टांंडा रैफर कर दिया जाता है।ऐसे में ही कई मरीज रास्ते जाते ही दम तोड़ चुके हैं।क्षेत्र के लोगों की हमेशा ही यहीं मांग रही है कि अगर मैडिकल कालेज चंबा खुला है तो इसमें सुविधाएं भी होना चाहिए नाम का मैडिकल कालेज होने से व्यवस्था में सुधार कैसे होगा।लाखों रुपए जहां स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए खर्च किया जा रहा है वहां अस्पताल में साजो-समान भी बढिय़ा रखने की जरूरत है।