शिक्षा विभाग का यह कैसा सौतेला व्यवहार 26 वर्षों में एक स्कुल को भवन तक नहीं दे पाई सरकार
जनजातीय क्षेत्र भरमौर के राजकीय उच्च विद्यालय सिन्यूर को अपग्रेड हुए 26 वर्षों का समय बीत चुका है लेकिन सरकार इस स्कूल को अपना भवन नहीं दे पाई है आपको बता दें कि यह स्कूल वर्ष 1996 में प्राथमिक स्कूल से माध्यमिक स्कूल बना था उसके बाद वर्ष 2006 में इसी स्कूल को अपग्रेड करके हाई स्कूल का दर्जा दे दिया गया हैरानी की बात यह है कि 12 वर्षों का लम्बा समय बीतने के बाद भी सरकार ने इस माध्यमिक स्कूल को भवन नहीं दिया और स्कूल को अपग्रेड करके हाई स्कूल का दर्जा दे दिया गया वर्तमान समय में स्कूल में करीब 50 के आसपास बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं और यह जो बच्चे हैं इन्हें जानवरों की तरह अलग-अलग कमरों में बैठाकर पढ़ाई करवाई जा रही है सरकार की लापरवाही का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि किराए के कमरों में जो बिजली की व्यवस्था करनी थी उसका बिल चुकता करने में भी शिक्षा विभाग की सांसे फूल रही है और उसको चुकाने में भी शिक्षा विभाग आनाकानी कर रहा है राजकीय उच्च विद्यालय सिन्यूर जहां करीब 50 के आसपास बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं और यह जो बच्चे हैं इन बच्चों को अलग-अलग किराए के कमरों में जो है वह जानवरों की तरह बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर है यही नहीं जिन जिन मकान मालिकों ने किराए पर यह कमरे स्कूल मैनेजमेंट को दिए थे अब वह भी हाथ खड़े कर रहे हैं उनका कहना है कि सरकार द्वारा उन्हें बेहद कम किराया दिया जा रहा है और ऊपर से बिजली का बिल तक सरकार चुकता करने में आनाकानी करती है और अब वह मांग कर रहे हैं कि कम से कम स्कूल को यहां से दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाए क्योंकि जब हमने यह स्कूल दिया था तब हमारे परिवारों के सदस्यों की संख्या सीमित थी लेकिन अब 26 से 28 वर्ष का समय बीत चुका है और हमारा जो परिवार बड़ा हो चुका है लिहाज़ा सरकार नए स्कूल भवन का निमार्ण करे जो एक प्रकार का कब्जा यहां पर स्कूल के नाम पर हो रखा है वह हटना चाहिए या फिर स्कूल जो है वह दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाए।
