धूमल का पलटवार, बोले- कांग्रेस ने बयान देने से पहले इतिहासिक तथ्यों को नहीं समझा
पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि सरकार की ओर से दिए गए उस बयान को पढ़कर आश्चर्य हुआ जिसमें भाजपा के हिमाचल विरोधी मानसिकता का जिक्र किया, लगता है ब्यान देने से पहले इतिहासिक तथ्यों को समझा ही नहीं गया और इसी कारण तथ्यों के विपरीत यह ब्यान दिया गया है । देश की जनता को तथ्यों से अवगत करवाने के लिए यह आवश्यक है कि सारी बात विस्तार से लोगों के समक्ष लाई जाए।
उन्होंने कहा कि पहली नवम्बर 1966 को पंजाब का पुनर्गठन हुआ उसमें से हरियाणा नया राज्य बना और पहाड़ी क्षेत्र हिमाचल में सम्मलित हुआ, उस समय केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी। संसद में पारित किए गए कानून पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 (Punjab Re-Organisation Act, 1966) के अन्तर्गत जितनी आबादी पुनर्गठन के आधार पर जिस प्रदेश में गई उतनी ही परिसम्पत्तियां और देनदारियां उस राज्य को मिलीं । उस समय देश और तीनों प्रदेशों में कांग्रेस सत्ता में थी लेकिन दुख की बात है कि जब भाखड़ा बांध व अन्य परियोजनाओं का बंटवारा हो रहा था तब हिमाचल सरकार के मुख्यमन्त्री या मन्त्री किसी बैठक में शामिल नहीं हुए, परिणामस्वरूप हिमाचल का दावा कमजोर रहा
धूमल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने ही बिद्युत परियोजनाओं में रॉयल्टी और हिमाचल के हिस्से का प्रश्न उठाया। अपनी मांगों को लेकर हिमाचल से लेकर दिल्ली तक अधिकार यात्रा निकाली गई जिसमें पंचायत समिति से लेकर संसद तक के प्रतिनिधि शामिल हुए। पूर्व मुख्यमन्त्री शान्ता कुमार जी विधायक दल के नेता थे उनके नेतृत्व में अधिकार यात्रा निकली, मैं उस समय पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष था । दिल्ली में हमने अपनी मांगों को लेकर धरना दिया
