चुनाव के बाद लगेगा महंगी बिजली का झटका
संवाददाता विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे ,
हिमाचल के शहरी क्षेत्र में ऐसे विद्युत उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का झटका लगने वाला है, जिनका बिजली मीटर बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए लगाया गया है। यह एनओसी स्थानीय निकाय की जरूरी मानी गई है। विद्युत नियामक आयोग ने वित्त वर्ष 2024-25 का टैरिफ तय करते समय अपने ऑर्डर में यह शर्त लगाई है। इसे लागू करना राज्य बिजली बोर्ड के लिए आवश्यक है। इससे बचा भी नहीं जा सकता। राज्य में वर्तमान में क्योंकि चुनाव चल रहे हैं, इसीलिए चुनाव के बीच पहली अप्रैल से इस सिफारिश को लागू करने के राजनीतिक नुकसान हो सकते थे। इसलिए फैसले को टालने के लिए बिजली बोर्ड ने एक क्लेरिफिकेशन इस बारे में विद्युत नियामक आयोग से मांग ली है। इस क्लेरिफिकेशन का जवाब आते-आते आचार संहिता खत्म हो जाएगी और चुनाव के बाद फिर नियामक आयोग की इस सिफारिश को लागू किया जाएगा।
खुद बिजली बोर्ड का यह मानना है कि शहरी क्षेत्र में हजारों मीटर बिना एनओसी के लगे हैं, क्योंकि एनओसी मैंडेटरी नहीं थी। ऐसे उपभोक्ताओं को नियामक आयोग की सिफारिश के अनुसार न तो राज्य सरकार की ओर से प्रति यूनिट दी जा रही सब्सिडी मिलेगी, न ही 125 यूनिट फ्री बिजली का दावा ये कर सकेंगे। ऐसे में इनके लिए टैरिफ की दर बढऩे वाली है। राज्य सरकार के सूत्रों की बात करें तो चुनाव के बाद बिजली बोर्ड के स्ट्रक्चर को लेकर भी राज्य सरकार बड़ा बदलाव कर सकती है।
बोर्ड में अभी ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करना बाकी है। इससे पहले बिजली बोर्ड को वित्तीय स्थायित्व की तरफ लाना होगा। चुनाव से पहले भी कैबिनेट में यह कोशिश हुई थी कि ऊर्जा निदेशालय के माध्यम से बेची जा रही रॉयल्टी की बिजली को बिजली बोर्ड को ही दिया जाए। हालांकि यह फैसला लागू नहीं हो पाया था। इस साल के टेरिफ ऑर्डर में भी बिजली बोर्ड के लिए कुछ सुझाव राज्य सरकार को नियामक आयोग ने दिए हैं। इन पर भी सरकार फैसला ले सकती है।-
