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नया सत्र तीन जून से, नई शिक्षा नीति पर संशय

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संवाददाता संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे,

बाहरी राज्यों की तर्ज पर हिमाचल में नई शिक्षा नीति को कॉलेज में इस सत्र से लागू करने पर संशय बना हुआ है। हालांकि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की ओर से नई शिक्षा नीति लागू करने को लेकर तैयारियां पूरी हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि बिना सरकार के मंजूरी के इसे कैसे लागू किया जाए। सबसे बड़ा चैलेंज यह है कि प्रदेश के डिग्री कालेज में नए सत्र के लिए तीन जून से एडमिशन का दौर शुरू होगा। चार जून को आचार संहिता हटेगी और उसके बाद नई शिक्षा नीति को लागू करना है या नहीं इस बारे में सरकार के पास एचपीयू की ओर से जो प्रस्ताव भेजा गया है, उस बारे में चर्चा हो पाएगी। ऐसे में यदि सरकार चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए मंजूरी देती है, तो भी इसके लिए औपचारिकताएं अभी बाकी हैं। एचपीयू प्रशासन का यह कहना है कि उनकी तरफ से नई शिक्षा नीति को किस तरह से लागू किया जाना है, इसके बारे में तैयारियां पूरी हैं। सबसे बड़ा चैलेंज है कि यदि तीन जून से छात्रों के लिए एडमिशन शुरू हो जाएंगे, तो सब्जेक्ट कांबिनेशन के लिए अभी सिलेब्स तैयार नहीं है।

सरकार की मंजूरी के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की बोर्ड ऑफ स्टडी की मीटिंग होनी है, जिसमें नई शिक्षा नीति का खाका रखा जाना है। इसके बाद फैकल्टी की बैठक कर इसे अप्रूवल दी जाएगी और सबसे अंतिम कार्यकारी परिषद की बैठक में इस नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी जानी है। इसे लागू करने के लिए तीन चरणों से गुजरना होगा। यदि एक महीने में यह प्रक्रिया पूरी हो भी जाए, तो भी सिलेबस की किताबें तैयार करने में समय लगेगा। ऐसे में यह माना जा रहा है कि इस साल से नई शिक्षा नीति को कॉलेज में लागू किसी भी सूरत में नहीं किया जा सकता।

एचपी यूनिवर्सिटी स्वायत्त संस्था

दूसरी और सवाल यह भी उठ रहे हैं की नई शिक्षा नीति का खाका जब एक साल पहले ही तैयार किया गया था, तो इसे सरकार की मंजूरी के लिए क्यों भेजा गया है? यूनिवर्सिटी अपने आप में एक स्वायत्त संस्था है और नियमों के तहत किसी भी फैसले को लेने के लिए यूनिवर्सिटी के पास यह अधिकार है। इसे बिना सरकार की मंजूरी के लागू न करने की बात कही जा रही है। अब कॉलेज में यह शिक्षा नीति लागू हो पाएगी या नहीं इस पर सवाल बना हुआ है।