बाल सुधार गृह अधीक्षक की याचिका खारिज
प्रार्थी को अपनी शिकायत के निवारण के लिए उपयुक्त अदालत के समक्ष जाने की दी स्वतंत्रता
संवाददाता विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे,
प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला के हीरानगर में स्थित बाल सुधार गृह के अधीक्षक कौशल गुलेरिया द्वारा अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने याचिका को खारिज करते हुए प्रार्थी को अपनी शिकायत के निवारण के लिए उपयुक्त अदालत के समक्ष जाने की स्वतंत्रता प्रदान की। प्रार्थी कौशल गुलेरिया को आवासी बच्चों की पिटाई एवं अन्य दुव्र्यवहार के आरोपों के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि प्रार्थी को सिक्योर गार्ड सिक्योरिटी एंड मैनपावर द्वारा बर्खास्त किया गया है और उसे नियुक्ति भी निजी संस्थानों द्वारा प्रदान की गई थी। इन तथ्यों के दृष्टिगत कोर्ट ने याचिका को रिट आदेश जारी करने योग्य न पाते हुए खारिज कर दिया। उल्लेखनीय है कि उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने बाल सुधार गृह में बच्चों के मानव अधिकारों के गंभीर उल्लंघन पर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा था, जिसे आपराधिक जनहित याचिका मानकर अदालत ने 17 मई को सरकार को नोटिस जारी किए थे।
हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक, विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी, सुधार गृह के पूर्व अधीक्षक कौशल गुलेरिया, कूक और किचन हैल्पर को नोटिस जारी कर 24 जून तक जवाब मांगा है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित बाल सुधार गृह में आपराधिक मामलों में विचाराधीन एवं सजा प्राप्त बच्चों को रखा जाता है। इसका उद्देश्य अपराधों में लिप्त बच्चों को सुधरने का अवसर देकर एक अच्छा नागरिक बनाना है। इससे बचने के लिए बच्चे कई बार सुधार गृह से भाग चुके हैं।
