हिमाचल की सडक़ों से ब्लैक स्पॉट खत्म, कम होंगे हादसे
सरकार ने रिपोर्ट तैयार कर सुप्रीम कोर्ट कमेटी को भेज
संवाददाता विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे,
हिमाचल प्रदेश की सर्पीली सडक़ों पर सालों से हादसों का कारण बने ब्लैक स्पॉट खत्म हो गए हैं। इन पर जो काम जिस एजेंसी ने करवाना था वो कर दिया है और इन ब्लैक स्पॉट को पूरी तरह से ठीक कर दिया है। हिमाचल सरकार की ओर से इस तरह की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट की संबंधित कमेटी को भेज दी गई है,जो आने वाले दिनों में ब्लैक स्पॉट की नई सूची हिमाचल प्रदेश को भेजेगी। फिलहाल पुराने ब्लैक स्पॉट खत्म हो गए हैं और अब नए बन चुके ब्लैक स्पॉट पर भविष्य में काम होगा। सूत्रों के अनुसार हिमाचल परिवहन विभाग के सडक़ सुरक्षा सैल की ओर से सुप्रीम कोर्ट की कमेटी को हाल ही में रिपोर्ट भेजी गई है,जो कि अहम है। हर तीन साल के बाद यह रिपोर्ट इस कमेटी को जाती है और वहां से नए ब्लैक स्पॉट की नई सूची राज्यों को भेजी जाती है। फिर उसपर आगे काम होता है। ऐसे में वर्तमान में जो ब्लैक स्पॉट यहां पर चिन्हित थे उनको पूरी तरह से दुरुस्त कर दिया है और इसकी सूचना भेज दी गई है। बताया जाता है कि केंद्रीय भूतल परिवहन एवं सडक़ मंत्रालय ब्लैक स्पॉर्ट चिन्हित करता है।
प्रदेश में उन्होंने वर्ष 2018-19 में 147 ब्लैक स्पॉट की सूची प्रदेश को भेजी थी। इसमें लोक निर्माण विभाग के तहत आने वाली सडक़ों के ब्लैक स्पॉट थे तो वहीं नेशनल हाई-वे अथॉरिटी, बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन तथा भूतल परिवहन मंत्रालय की सडक़ें हैं। वैसे केंद्रीय मंत्रालय को तीन साल बाद नई सूची भेजनी थी, लेकिन अभी तक इस सूची का इंतजार किया जा रहा है। इससे पहले वह राज्य से मिलने वाली रिपोर्ट का इंतजार करते हैं और अब परिवहन विभाग ने यह रिपोर्ट केंद्रीय मंत्रालय के साथ सुप्रीम कोर्ट की सडक़ सुरक्षा मॉनिटरिंग कमेटी को जाती है। उनके द्वारा ही सडक़ सुरक्षा पर सभी तरह के निर्देश राज्यों को दिए जाते हैं और उन पर राज्य सरकार अमल करती है। -एचडीएम
ऐसे तय होता है ब्लैक स्पॉट
ब्लैक स्पॉट को चिन्हित करने की परिभाषा को देखें तो सडक़ के 500 मीटर के स्ट्रेच में तीन साल में पांच दुर्घटनाएं हों या फिर तीन साल में दस लोगों की मौत उसी स्थान पर हो तो उसे ब्लैक स्पॉट माना जाता है। इस स्थान की पूरी पड़ताल के बाद इसे किस तरह से दुरुस्त किया जाना है यह देखा जाता है। वहां देखा जाता है कि आखिर दुर्घटना का कारण क्या हो रहा है।
909 किलोमीटर सडक़ों पर लगाए क्रैश बैरियर
प्रदेश में वाहनों के योग्य सडक़ों की दूरी 41 हजार किलोमीटर की मानी जाती है। इन सडक़ों पर बड़े व छोटे वाहन चलते हैं। हैरानी की बात है कि हिमाचल प्रदेश जैसे कठिन भौगोलिक एरिया वाले राज्य जिसकी सडक़ें पहाड़ को काट कर बनाई गई हैं में अब तक 909 किलोमीटर सडक़ों ही क्रैश बैरियर लगाए जा सके हैं। क्रैश बैरियर सडक़ सुरक्षा के लिए बेहद ज्यादा जरूरी माने जाते हैं मगर हिमाचल की सभी सडक़ों के लिए इतने क्रैश बैरियर लगाने को बेहद ज्यादा पैसा चाहिए। वैसे सरकार ने पैराफिट लगाए हैं मगर उनसे उतना अधिक बचाव नहीं हो पाता। बहुत सी ऐसी सडक़ें हैं, जहां न तो क्रैश बैरियर है और न ही पैराफिट हैं, जो 147 ब्लैक स्पॉट थे और अब उनको ठीक कर दिया है में लोक निर्माण की सडक़ों पर 71, एनएच शिमला की सडक़ों पर 69, एनएच चंडीगढ़ की सडक़ों पर तीन, बीआरओ की सडक़ पर एक, परिवहन मंत्रालय की सडक़ों पर पांवटा में तीन ब्लैक स्पॉट चिन्हित थे। अब इनको पूरी तरह से ठीक करने की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट कमेटी को भेज दी गई है।
